कोलकाता: महानगर का हाई-प्रोफाइल कालीघाट थाना इन दिनों पुलिस अधिकारियों के तबादलों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस प्रशासन की 'अस्थिरता' का आलम यह है कि पिछले 36 दिनों के भीतर यहाँ चार बार थानेदार (OC) बदले जा चुके हैं। ताजा घटनाक्रम में, महज़ 24 घंटे के भीतर ही आदेश पलटते हुए नए ओसी की नियुक्ति कर दी गई है।

24 घंटे का नाटकीय घटनाक्रम

शनिवार को एक आदेश जारी कर गौतम दास के स्थान पर चमेली मुखर्जी को कालीघाट थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन प्रशासन का यह फैसला 24 घंटे भी नहीं टिक सका। रविवार को पुलिस आयुक्त अजय नंद के निर्देश पर एक बार फिर फेरबदल हुआ और चमेली मुखर्जी को पदमुक्त कर बलाई बाग को कमान सौंप दी गई। बलाई बाग इससे पहले पोलेरहाट थाने में अतिरिक्त थानेदार के रूप में तैनात थे।

36 दिनों का लेखा-जोखा: कब-कौन बदला?

चुनाव की घोषणा के बाद से ही इस थाने में नियुक्तियों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है:

29 मार्च: चुनाव आयोग के निर्देश पर खुफिया विभाग के उत्पल घोष को पहली बार यहाँ तैनात किया गया।

एक महीने बाद: उत्पल घोष को हटाकर गौतम दास की नियुक्ति हुई।

शनिवार: गौतम दास की जगह चमेली मुखर्जी आईं।

रविवार: चमेली मुखर्जी की जगह अब बलाई बाग ने कमान संभाली है।

प्रशासनिक स्थिरता पर उठते सवाल

इतने कम समय में बार-बार हो रहे बदलावों ने पुलिस महकमे और राजनैतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जानकारों का मानना है कि अति-संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद, अधिकारियों का इस तरह पलक झपकते ही बदला जाना प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया और समन्वय पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

खास बात: कालीघाट थाना क्षेत्र न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि मुख्यमंत्री का आवास होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से भी सर्वोच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। ऐसे में '24 घंटे' वाला यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है।