कानपुर: कानपुर के किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परत दर परत चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। खुद को मजबूर बताकर किडनी बेचने का दावा करने वाला बिहार (बेगूसराय) का आयुष चौधरी अब जांच के घेरे में है। पुलिस के अनुसार, आयुष कोई मासूम पीड़ित नहीं, बल्कि एक शातिर अपराधी है जिसने पुलिस को गुमराह करने के लिए "फीस भरने" की झूठी कहानी गढ़ी थी।

18 बीघा जमीन और अय्याशी की दास्तां

आयुष ने शुरुआत में पुलिस को बताया था कि वह देहरादून की ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में MBA का छात्र है और चौथे सेमेस्टर की फीस जमा करने के लिए उसने किडनी बेची। लेकिन पुलिस जांच में यह सब सफेद झूठ निकला:

जमीन की बिक्री: आयुष ने अपनी गलत संगत, नशे की लत और एयरहोस्टेस गर्लफ्रेंड के शौक पूरे करने के लिए गांव की 18 बीघा पैतृक जमीन बेच दी।

राजनीतिक शौक: उसने अपने एक दोस्त को बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़वाने के लिए भी जमीन के पैसे पानी की तरह बहाए।

पारिवारिक त्रासदी: आयुष की हरकतों से तंग आकर उसके पिता राजेश ने 2017 में आत्महत्या कर ली थी। वह 2021 के बाद से अपने गांव भी नहीं गया है।

साइबर ठगी और 'म्यूल अकाउंट' का कनेक्शन

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, आयुष का नाता साइबर अपराध से भी जुड़ा है।

वह ठगों को म्यूल अकाउंट (धोखाधड़ी के पैसे मंगाने के लिए किराए के खाते) उपलब्ध कराता था।

गुजरात के सुरेंद्रनगर की साइबर सेल ने उसे पहले ही नोटिस भेज रखा है।

टेलीग्राम पर 'किडनी डोनर' नामक ग्रुप के जरिए वह इस रैकेट के संपर्क में आया था, जहां शुरू में उसे छोटे-छोटे टास्क दिए जाते थे।

विदेशी कनेक्शन: दक्षिण अफ्रीकी महिला 'अरेबिका' की तलाश

पुलिस अब उस दक्षिण अफ्रीकी मूल की महिला अरेबिका की जानकारी जुटा रही है, जिसने 3 मार्च को आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था।

दूतावास को पत्र: पुलिस ने दूतावास और इमीग्रेशन विभाग को पत्र लिखकर पूछा है कि अरेबिका भारत किस उद्देश्य से आई थी।

संदेह: ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद किसी मरीज का विदेश जाना मुश्किल है, इसलिए पुलिस को शक है कि वह अब भी देश में कहीं छिपी हो सकती है।

जांच के अगले चरण

शिवम अग्रवाल से पूछताछ: जेल में बंद मुख्य आरोपी शिवम अग्रवाल से पुलिस मंगलवार को पूछताछ करेगी। उसके मोबाइल से कई आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की रिमांड मांगी जाएगी।

नवीन पांडेय की तलाश: प्रयागराज स्थित घर पर छापेमारी के दौरान नवीन फरार मिला। वह अपने परिवार को झांसा देता था कि वह दिल्ली-NCR में बैटरी का बड़ा कारोबार करता है।

डॉ. अफजल का नेटवर्क: मामले के आरोपी डॉ. अफजल के साथ गाजियाबाद के अपराधी सरफराज सैफी का नाम भी सामने आया है, जो लूट और डकैती के मामले में जेल जा चुका है।

निष्कर्ष: कानपुर का यह किडनी कांड अब केवल अंगों की अवैध तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें साइबर अपराध, फर्जी दस्तावेज और अंतरराष्ट्रीय लिंक के गहरे तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। 7 अप्रैल 2026 की ताज़ा स्थिति के अनुसार, पुलिस अब इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर की मदद से इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है।