कानपुर: शहर की वीआईपी रोड पर अपनी रफ़्तार और रसूख का प्रदर्शन करने वाले तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। करीब 10 करोड़ रुपये की लैंबोर्गिनी रेवुएल्टो से कई लोगों को रौंदने के चार दिन बाद, पुलिस ने आरोपी को उसके घर से दबोचा। पुलिस ने साफ कर दिया है कि हादसे के वक्त स्टीयरिंग व्हील पर कोई और नहीं, बल्कि शिवम खुद मौजूद था।

हादसे के बाद बाउंसरों का 'रेस्क्यू ऑपरेशन'

रविवार दोपहर ग्वालटोली इलाके में जब यह लग्जरी कार अनियंत्रित हुई, तो उसने एक ऑटो, बुलेट और पैदल चल रहे लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद पीछे चल रही सुरक्षा गाड़ियों से बाउंसर उतरे और भीड़ को धक्का देकर हटाया। रसूख का आलम यह था कि:

सुरक्षाकर्मियों ने ईंट से कार का शीशा तोड़कर शिवम को बाहर निकाला।

पहचान छिपाने के लिए कार की नंबर प्लेट तोड़ने की कोशिश की गई।

घायलों की मदद करने के बजाय आरोपी को निजी अस्पताल पहुँचाने की प्राथमिकता दी गई।

फर्जी ड्राइवर का सरेंडर और पुलिस की सख्ती

बुधवार को इस मामले में उस वक्त नाटकीय मोड़ आया जब 'मोहन' नाम के एक शख्स ने कोर्ट में सरेंडर कर दावा किया कि कार वह चला रहा था। हालांकि, पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। जाँच और तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो गया कि हादसे के समय शिवम ही ड्राइविंग सीट पर था।

घायलों की हालत और कानूनी पेंच

इस भीषण टक्कर में 18 वर्षीय ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक, विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मुख्य शिकायतकर्ता तौफीक के पैर में गंभीर चोट आई है। हालांकि, आरोपी के वकील ने दावा किया कि पीड़ित अब कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता, जिसे पुलिस ने रसूख के दबाव का हिस्सा मानकर जाँच जारी रखी है।