तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजते ही कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। मंगलवार (17 मार्च) को कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने राज्य की 140 सीटों में से 55 उम्मीदवारों की पहली आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस सूची में अनुभव और युवा जोश का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
प्रमुख चेहरे और उनके चुनावी क्षेत्र
पार्टी ने अपने सबसे कद्दावर नेताओं को उनकी पारंपरिक सीटों से मैदान में उतारकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती:
रमेश चेन्निथला: कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य चेन्निथला एक बार फिर हरिपद सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगे।
वी.डी. सतीशन: विपक्ष के नेता सतीशन को परवूर से टिकट दिया गया है।
चांडी ओम्मन: पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी के बेटे चांडी ओम्मन अपनी मौजूदा सीट पुथुपल्ली से चुनाव लड़ेंगे।
सनी जोसेफ: केरल प्रदेश अध्यक्ष को पेरावूर से उम्मीदवार बनाया गया है।
अन्य दिग्गज: राम्या हरिदास को चिरयिनकीझु और के. मुरलीधरन को वट्टियूरकावु से मैदान में उतारा गया है।
रणनीतिक बदलाव और नियुक्तियां
पहली सूची की खास बात यह है कि पार्टी ने 20 मौजूदा विधायकों पर फिर से भरोसा जताया है। इसके साथ ही, डिजिटल मोर्चे पर पकड़ मजबूत करने के लिए प्रणव वच्छराजानी और विपिन यादव को सोशल मीडिया विभाग की गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
केरल चुनाव 2026: महत्वपूर्ण तारीखें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, राज्य में चुनावी प्रक्रिया का शिड्यूल इस प्रकार है:
| कार्यक्रम | तिथि |
|---|---|
| अधिसूचना जारी होने की तारीख | 16 मार्च 2026 |
| नामांकन की अंतिम तिथि | 23 मार्च 2026 |
| मतदान (एक चरण में) | 9 अप्रैल 2026 |
| मतगणना और परिणाम | 4 मई 2026 |
| विधानसभा कार्यकाल समाप्ति | 23 मई 2026 |
चुनावी समीकरण और इतिहास
केरल में कुल 2.70 करोड़ मतदाता इस बार राज्य की अगली सरकार का फैसला करेंगे। 2021 के चुनावों में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ (LDF) ने 140 में से 99 सीटें जीतकर इतिहास रचा था। इस बार कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) सत्ता विरोधी लहर और अपने दिग्गज नेताओं के भरोसे 'सत्ता परिवर्तन' की उम्मीद लगाए बैठी है।
निष्कर्ष: कांग्रेस की इस पहली सूची से साफ है कि पार्टी ने अपनी 'ए-टीम' को फ्रंट फुट पर रखा है। अब देखना यह होगा कि 4 मई को आने वाले नतीजे केरल की उस परंपरा को दोहराते हैं जिसमें हर पांच साल में सत्ता बदलती है, या एलडीएफ एक बार फिर अपना किला बचाने में सफल रहती है।





