कुरुक्षेत्र: प्रेम प्रसंग और धोखे की एक खौफनाक दास्तां का अंत आखिरकार अदालत के कड़े फैसले के साथ हुआ। कुरुक्षेत्र के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति की हत्या की दोषी पत्नी, उसके प्रेमी और एक अन्य साथी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

अदालत ने माना कि पत्नी बलजिंद्र कौर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर न केवल अपने सुहाग को उजाड़ा, बल्कि कानून के साथ भी लुका-छिपी खेलने की कोशिश की।

साजिश के तहत गई थी मायके

मामला 20 जुलाई 2020 का है। जांच में सामने आया कि दोषी पत्नी बलजिंद्र कौर हत्या से ठीक एक महीने पहले अपने आठ वर्षीय बेटे को लेकर मायके (गांव शादीपुर) चली गई थी। यह उसके खौफनाक प्लान का हिस्सा था ताकि घर पर उसका पति मनजीत सिंह अकेला रहे और शक की सुई उस पर न घूमे।

दीवार फांदकर घुसे थे 'मौत के सौदागर'

वारदात वाली रात, जब मनजीत सिंह घर में अकेला सो रहा था, तब पंजाब के पटियाला (जलाहा खेड़ी गांव) से आए प्रेमी जसविंद्र सिंह और उसके साथी बलजीत सिंह ने दीवार फांदकर घर में प्रवेश किया। दोषियों ने बड़ी बेरहमी से मनजीत की हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए।

खुद फोन कर रचा 'अनजान' होने का ढोंग

अगली सुबह, साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए बलजिंद्र कौर ने अपनी सास को फोन किया और कहा कि मनजीत उसका फोन नहीं उठा रहा है। जब मां ने जाकर देखा, तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था। कुंडा खोलकर अंदर जाने पर मनजीत का शव औंधे मुंह पड़ा मिला।

"यह एक पूर्वनियोजित हत्या थी जिसमें रिश्तों को शर्मसार किया गया। पुलिस की गहन जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया गया।" — मेनपाल राणा, जिला न्यायवादी

न्याय की जीत

जिला न्यायवादी मेनपाल राणा ने बताया कि पिहोवा पुलिस ने बलदेव कौर (मृतक की मां) की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।

निष्कर्ष: कुरुक्षेत्र की अदालत का यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि अपराध चाहे कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है।