रांची/धनबाद। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में हुए भीषण अमोनिया गैस रिसाव हादसे के बाद झारखंड सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने राज्य के 42 प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कड़े निर्देशों के बाद सक्रिय हुए श्रम विभाग और राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने तमिलनाडु प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। हालांकि, इस दर्दनाक हादसे में धनबाद की रहने वाली एक महिला श्रमिक प्रीति देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई।

चेन्नई से विशेष स्लीपर कोच के जरिए लौटे 42 श्रमिक

तिरुवल्लूर स्थित 'सेंट पीटर्स एंड पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स फैक्ट्री' में 21 जून को हुए अमोनिया गैस रिसाव के बाद प्रभावित श्रमिकों में भारी दहशत थी। झारखंड के 42 श्रमिकों ने जब अपने गृह राज्य लौटने की इच्छा जताई, तो सरकार ने बिना समय गंवाए रेलवे से संपर्क साधा।

विशेष व्यवस्था: झारखंड सरकार के विशेष अनुरोध पर रेलवे ने 'अलप्पुझा-धनबाद एक्सप्रेस' में एक अलग स्लीपर कोच की व्यवस्था की।

प्रस्थान: मंगलवार को सभी 42 श्रमिकों को चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया। यात्रा के दौरान राज्य सरकार द्वारा उनके भोजन, पानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।

शव को हवाई मार्ग से लाया जा रहा रांची, पूरे सम्मान के साथ भेजी जाएगी एंबुलेंस

इस हादसे में चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी अस्पताल में दम तोड़ने वाली धनबाद की प्रीति देवी के परिजनों को सरकार ने हर संभव सहायता पहुंचाई। राज्य सरकार ने परिजनों के तमिलनाडु पहुंचने से लेकर शव की पहचान, पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को स्थानीय प्रशासन के सहयोग से त्वरित गति से पूरा कराया। मृतका का पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से मंगलवार शाम रांची लाया जाएगा, जहां से एंबुलेंस के जरिए ससम्मान उनके पैतृक जिला धनबाद भेजा जाएगा।

मुआवजा और वैधानिक लाभ दिलाने में जुटी सरकार

राज्य सरकार ने इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। श्रम विभाग और राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष लगातार फैक्ट्री मालिक (नियोक्ता) और तमिलनाडु के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।

सरकारी संकल्प: सरकार ने स्पष्ट किया है कि मृतका प्रीति देवी के आश्रितों को नियमानुसार उचित मुआवजा और अन्य सभी वैधानिक लाभ जल्द से जल्द दिलाने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही अन्य प्रभावित श्रमिकों की भी पूरी मॉनिटरिंग की जा रही है।