नई दिल्ली | रेलवे में 'जमीन के बदले नौकरी' (Land-for-Jobs) घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में उनकी एक महत्वपूर्ण याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या थी लालू-राबड़ी की मांग?
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने कोर्ट से उन 1600 पन्नों के दस्तावेजों की मांग की थी, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच के दौरान इकट्ठा तो किया था, लेकिन उन पर भरोसा (Unrelying Documents) नहीं किया था। आरोपियों का तर्क था कि मामले की बेहतर समझ के लिए ये दस्तावेज उन्हें मिलने चाहिए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'उल्टी गंगा बहाने जैसा'
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने याचिका को खारिज करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने इस मांग को 'उल्टी गंगा बहाने जैसा' करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि:
इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों की मांग करना केवल ट्रायल (मुकदमे) की प्रक्रिया में देरी करने का एक तरीका है।
इन दस्तावेजों की इस स्तर पर कोई आवश्यकता नहीं है और इन्हें स्वीकार करने से कार्यवाही अनावश्यक रूप से लंबी खिंचेगी।
अन्य आरोपितों की उम्मीदें भी धराशायी
अदालत ने केवल लालू परिवार ही नहीं, बल्कि इस मामले से जुड़े अन्य आरोपितों— आरके महाजन और महीप कपूर की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
आरके महाजन ने 1 दस्तावेज की मांग की थी।
महीप कपूर ने 23 अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग की थी।
केस का वर्तमान स्टेटस
राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) की जांच के पक्ष में एक बड़ी मजबूती माना जा रहा है। अब इस मामले की सुनवाई बिना किसी अतिरिक्त देरी के आगे बढ़ने की उम्मीद है। भ्रष्टाचार के इस गंभीर मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनके परिजनों पर रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लिखवाने के गंभीर आरोप हैं।





