भोपाल:

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) और गृह विभाग के बीच एक इजराइली साइबर फोरेंसिक टूल का लाइसेंस खरीदने और अपग्रेडेशन के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुँचा, लेकिन उन्होंने अंतिम निर्णय लेने से पहले फाइल को वित्त विभाग की राय लेने के निर्देश के साथ गृह विभाग को वापस लौटा दिया है।

यह खींचतान न केवल वेंडर के भुगतान में देरी की वजह बनी है, बल्कि इसने पुलिस महानिदेशक (DGP) की वित्तीय शक्तियों पर भी प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

पुलिस मुख्यालय साइबर जांच में बेहद कारगर माने जाने वाले इस इजराइली फोरेंसिक सॉफ्टवेयर का उपयोग लंबे समय से कर रहा है। विवाद तब शुरू हुआ जब पीएचक्यू ने अतिरिक्त लाइसेंस और सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेड वर्जन खरीदने के लिए फंड के पुनर्विनियोजन (Re-appropriation) की मांग की।

फाइलें धूल फांक रहीं, वेंडर को भुगतान का इंतजार

यह मामला वर्ष 2025 से ही पीएचक्यू और गृह विभाग के बीच पत्रों के आदान-प्रदान में उलझा हुआ है।

उपयोग जारी, भुगतान ठप: पुलिस विभाग द्वारा इस सॉफ्टवेयर का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक असहमति के कारण वेंडर को बकाया भुगतान नहीं हो पा रहा है।

अपग्रेडेशन में देरी: भुगतान और प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में सॉफ्टवेयर के नए लाइसेंस और अपग्रेडेशन का काम अधर में लटका है।

अब वित्त विभाग की राय पर टिकीं निगाहें

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद अब सबकी नजरें वित्त विभाग के रुख पर हैं।

"वित्त विभाग की राय से ही यह तय हो पाएगा कि क्या DGP को मिले अधिकारों के तहत खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है या इसके लिए राज्य सरकार से अलग प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति लेनी होगी। यह फैसला भविष्य में MP पुलिस द्वारा तकनीकी व साइबर उपकरणों की खरीद के लिए एक नई नजीर तय करेगा।" — वरिष्ठ प्रशासनिक सूत्र