उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकाल के दरबार में 'भस्म आरती' के दर्शन करने की चाह रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया में लगातार मिल रही धांधली और गड़बड़ी की शिकायतों के बाद, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने नियमों को बेहद सख्त कर दिया है।
नए नियम के मुताबिक, अब कोई भी श्रद्धालु (चाहे वह आम नागरिक हो या प्रोटोकॉल/VIP श्रेणी के अंतर्गत आने वाला व्यक्ति) एक मोबाइल नंबर और एक सरकारी पहचान पत्र से तीन महीने (90 दिन) में केवल एक बार ही भस्म आरती की अनुमति (बुकिंग) ले सकेगा। एक बार दर्शन करने के बाद दोबारा बुकिंग के लिए उसी नंबर से पूरे 90 दिनों का इंतजार करना होगा।
नियमों में क्या बदला? (एक नजर में)
| पहले की व्यवस्था | अब लागू हुआ नया नियम |
|---|---|
| वीआईपी और प्रोटोकॉल के जरिए हर महीने बुकिंग संभव थी। | आम श्रद्धालु हो या वीआईपी, हर मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ 1 बार बुकिंग होगी। |
| कुछ चुनिंदा लोग बार-बार ऑनलाइन अनुमति लेकर दर्शन कर लेते थे। | एक बार अनुमति मिलने के बाद उसी मोबाइल नंबर और पहचान पत्र (आईडी कार्ड) पर 90 दिन का लॉक लग जाएगा। |
| आम भक्तों को महीनों तक स्लॉट नहीं मिलते थे। | मकसद: बार-बार दर्शन करने वालों पर रोक लगाना और सभी भक्तों को समान अवसर देना। |
पुराना नियम, नई सख्ती: प्रशासक ने दी जानकारी
इस पूरे मामले पर महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्थिति साफ करते हुए बताया कि यह व्यवस्था पूरी तरह नई नहीं है, बल्कि पहले से तय नियमों को अब और अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से कड़ा किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने भी भस्म आरती की बुकिंग में मिल रही शिकायतों के बाद एक आईडी और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय चलने के बाद यह व्यवस्था शिथिल हो गई थी, लेकिन अब शिकायतों के दोबारा बढ़ने पर इसे पूरी तरह अनिवार्य और अभेद्य बना दिया गया है ताकि कोई भी सॉफ्टवेयर या सिस्टम का गलत फायदा न उठा सके।
आम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत, बढ़ेगी पारदर्शिता
मोनोपॉली का अंत: मंदिर समिति के इस कड़े कदम से उन लाखों आम भक्तों को सीधा फायदा होगा जो महीनों पहले से प्रयास करने के बाद भी ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। अब बार-बार दर्शन करने वाले सिंडिकेट और वीआईपी कोटा के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम लगेगी। मंदिर प्रशासन का दावा है कि इस डिजिटल सख्ती से भस्म आरती की पूरी व्यवस्था में अभूतपूर्व पारदर्शिता आएगी।





