नई दिल्ली/वाराणसी। आज देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शिवालयों में 'हर-हर महादेव' और 'ओम नमः शिवाय' के उद्घोष गूंज रहे हैं। भक्त रात के चारों प्रहर की पूजा में लीन हैं। लेकिन व्रत की पूर्णता तभी मानी जाती है जब उसका पारण (व्रत खोलना) विधि-विधान और सही समय पर किया जाए।

साल 2026 में फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि आज शाम से शुरू हो चुकी है और इसका पारण कल, 16 फरवरी को किया जाएगा।

महाशिवरात्रि 2026: व्रत पारण का शुभ मुहूर्त

धर्म शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत का पारण चतुर्दशी तिथि के भीतर और सूर्योदय के पश्चात करना फलदायी होता है।

पारण शुरू होने का समय: कल सुबह 06:59 बजे से।

पारण समाप्त होने का समय: कल दोपहर 03:24 बजे तक।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप चारों प्रहर की पूजा कर रहे हैं, तो अंतिम प्रहर की आरती और पूजा संपन्न करने के बाद ही इस समय सीमा के भीतर अपना व्रत खोलें।

पारण से पहले ऐसे करें महादेव को प्रसन्न

मान्यता है कि व्रत खोलने से पहले भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

शिवलिंग पूजन: शिवलिंग पर जल, गंगाजल और दूध अर्पित करें।

प्रिय वस्तुएं: महादेव को अति प्रिय बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अक्षत (चावल) समर्पित करें।

भोग और आरती: शिव जी को फल या मिठाई का भोग लगाएं और अंत में धूप-दीप से आरती करें।

दान का है विशेष महत्व

महाशिवरात्रि का व्रत केवल पूजन से ही नहीं, बल्कि सेवा और दान से पूर्ण होता है। पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज, मौसमी फल या वस्त्र का दान अवश्य करें। सनातन धर्म में दान को महादेव की प्रसन्नता का सबसे सरल मार्ग बताया गया है।

"शास्त्रों के अनुसार, यदि नियमों के साथ व्रत का पारण न किया जाए, तो भक्ति का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना अनिवार्य है।"

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अपनी कुल परंपरा और पंडितों के परामर्श अनुसार ही व्रत का पालन करें।