कोलकाता:
पश्चिम कोलकाता के तारातला इलाके से एक बेहद दुखद और बड़ा हादसा सामने आया है। बुधवार दोपहर को यहां ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर एक तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस भीषण हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि मलबे के नीचे अभी भी कई मजदूरों के दबे होने की चिंताजनक खबर है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई हैं। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं।
दोपहर 12 बजे ब्रेस ब्रिज के पास मची चीख-पुकार
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक हादसा दोपहर करीब 12 बजे ब्रेस ब्रिज के पास हुआ। चश्मदीदों ने बताया कि इमारत के गिरते ही वहां धूल का गुबार छा गया और मलबे के नीचे से लोगों के चीखने-चिल्लाने और मदद मांगने की आवाजें आने लगीं।
तत्परता दिखाते हुए बचाव दल ने अब तक 10 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इन सभी घायलों को इलाज के लिए तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कैसे हुआ यह भयानक हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब यह हादसा हुआ, उस समय गोदाम की तीसरी मंजिल की छत की ढलाई (कास्टिंग) का काम चल रहा था। इमारत की पहली और दूसरी मंजिल का ढांचा पहले ही तैयार हो चुका था और ग्राउंड फ्लोर पर कुछ निर्माण कार्य जारी था। अचानक पूरी इमारत भरभरा कर बैठ गई, जिससे लोहे के भारी-भरकम बीम और कंक्रीट का एक विशाल ढेर लग गया। वहां काम कर रहे मजदूर इस भारी मलबे के नीचे पूरी तरह दब गए।
सेना और आपदा प्रबंधन संभाल रहे मोर्चा
मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए कंक्रीट के इस पहाड़ के बीच युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है:
संयुक्त बचाव दल: कोलकाता पुलिस, आपदा प्रबंधन समूह (DMG), नागरिक सुरक्षा (Civil Defence) और दमकल विभाग की टीमें संयुक्त रूप से जुटी हुई हैं।
सेना की मदद: रेस्क्यू ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए सेना के अधिकारी और जवान भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में हाथ बंटा रहे हैं।
आधुनिक उपकरणों का उपयोग: लोहे के बीम और कंक्रीट के बड़े स्लैब को काटने के लिए गैस कटर और वर्टिकल ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारी मलबे को हटाने के लिए विशालकाय क्रेनें लगाई गई हैं।
घटिया सामग्री और अवैध निर्माण के गंभीर आरोप
इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने प्राथमिक तौर पर आरोप लगाया है कि गोदाम के निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। वहीं, स्थानीय निवासियों ने भी रोष व्यक्त करते हुए शिकायत की है कि इस पूरे इलाके में पिछले काफी समय से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिन पर कोई लगाम नहीं है।
मौके पर पहुंचे राजनेता और आला अधिकारी
हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई। शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल, कोलकाता नगर निगम आयुक्त स्मिता पांडे और मंत्री इंद्रनील खान स्थिति का निरीक्षण करने घटनास्थल पर पहुंचे। भाजपा नेता राकेश सिंह भी वहां मौजूद थे। मंत्री इंद्रनील खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "इस वक्त हमारी सबसे पहली और एकमात्र प्राथमिकता मलबे में फंसे अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना है। हादसे के कारणों और किसी भी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी अनियमितता की जांच बाद में पूरी कड़ाई से की जाएगी।"
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी
राज्य सचिवालय ने इस संकट की घड़ी में पीड़ितों के परिजनों और आम जनता की मदद के लिए तुरंत कंट्रोल रूम स्थापित कर निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
1070
8697981070
033-22143526
033-22535185
प्रशासन पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है।





