रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने एक कड़ा संदेश देते हुए इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) रतन लाल डांगी को उनके पद से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक महिला द्वारा लगाए गए शारीरिक, मानसिक उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के आरोपों के बाद की गई है। आरोपी अधिकारी को निलंबन अवधि के दौरान रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में अटैच किया गया है।

विवाद और आरोपों की पृष्ठभूमि

यह मामला पिछले साल तब तूल पकड़ा जब छत्तीसगढ़ पुलिस के ही एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने आईजी डांगी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।

संपर्क की शुरुआत: महिला का आरोप है कि 2017 में जब डांगी कोरबा में एसपी (SP) थे, तब सोशल मीडिया के जरिए उनसे संपर्क हुआ था।

गंभीर आरोप: शिकायत के अनुसार, अधिकारी ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर महिला पर दबाव बनाया, उसे आधिकारिक बंगले पर बुलाया और वीडियो कॉल्स के जरिए मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी।

साक्ष्य: महिला ने इन आरोपों को साबित करने के लिए कुछ डिजिटल सबूत होने का भी दावा किया है।

सस्पेंशन का आधिकारिक आधार

निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रथम दृष्टया यह अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

नैतिक मर्यादा का उल्लंघन: अधिकारी ने अपने पद के अनुरूप गरिमा बनाए रखने में विफलता दिखाई।

आधिकारिक प्रभाव का दुरुपयोग: पद का इस्तेमाल व्यक्तिगत स्वार्थ और अनुचित कार्यों के लिए किया गया।

विभाग की छवि को नुकसान: सोशल मीडिया पर इन आरोपों के वायरल होने से छत्तीसगढ़ पुलिस की साख पर बुरा असर पड़ा।

विभागीय जांच और प्रतिबंध

राज्य सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए आईजी आनंद छाबड़ा और डीआईजी मिलना कुर्रे की दो सदस्यीय समिति का गठन किया है।

नियम: यह निलंबन 'अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969' के तहत किया गया है।

शर्तें: निलंबन के दौरान रतन लाल डांगी बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे और उन्हें केवल निर्धारित निर्वाह भत्ता ही मिलेगा।

मामले का घटनाक्रम: एक नजर में

तिथि / विवरणमुख्य जानकारी
शिकायत की तारीख15 अक्टूबर 2025 (पिछले साल)
आरोपी अधिकारीरतन लाल डांगी (2003 बैच IPS)
जांच समितिIG आनंद छाबड़ा और DIG मिलना कुर्रे
वर्तमान स्थितितत्काल प्रभाव से निलंबित, PHQ रायपुर अटैच

निष्कर्ष: इस कार्रवाई से सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अनुशासन और नैतिक मर्यादा के मामले में किसी भी स्तर के अधिकारी को रियायत नहीं दी जाएगी। अब सभी की निगाहें विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।