पटना।

बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। टेंडर घोटाले और रिश्वतखोरी के मामले में पटना की बेउर जेल (केंद्रीय कारागार) में बंद बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के वरिष्ठ अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी को आखिरकार तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

जेल जाने की तिथि से ही प्रभावी माना जाएगा निलंबन

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मुमुक्षु कुमार चौधरी के खिलाफ रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति, पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े बेहद गंभीर आरोप हैं।

कानूनी प्रावधान: बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत, यदि कोई सरकारी सेवक 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे निलंबित करने का प्रावधान है।

कब से प्रभावी: आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनका यह निलंबन कारावास की तिथि से ही प्रभावी माना जाएगा और अगले आदेश (अगली अधिसूचना) तक जारी रहेगा।

विशेष अदालत के आदेश पर 11 जून से जेल में हैं बंद

BAS अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी की मुश्किलें उस समय बढ़ीं जब विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का नियमित मामला दर्ज किया।

जांच की वर्तमान स्थिति:

विशेष कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद 11 जून को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया था। तब से वह पटना के बेउर जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियां इस समय सरकारी टेंडरों से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

विभागीय और न्यायिक कार्रवाई दोनों मोर्चों पर घिरे

सामान्य प्रशासन विभाग ने साफ कर दिया है कि यह निलंबन केवल उनकी सरकारी सेवा और प्रशासनिक अनुशासन से संबंधित है।

अधिकार और दायित्व: निलंबन की अवधि के दौरान उनके सेवा संबंधी सभी अधिकार और भत्ते लागू नियमों के अनुसार ही संचालित होंगे।

आगे की कार्रवाई: सरकार की ओर से आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई कोर्ट के फैसले और विभागीय जांच की प्रगति के आधार पर तय की जाएगी।

बिहार सरकार की इस सख्त कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका पद कितना भी बड़ा क्यों न हो।