अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक में बड़े प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं। ट्रस्ट ने एक ओर जहाँ मंदिर का विस्तृत वित्तीय ब्योरा सार्वजनिक किया है, वहीं दूसरी ओर चढ़ावे में अनियमितताओं को लेकर आई एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट के खुलासे भी सामने रखे हैं। इस प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्णमोहन को आगामी व्यवस्था तक अंतरिम महासचिव की कमान सौंपी गई है।

SIT रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: कर्मचारियों के खातों में मिला संदिग्ध कैश

अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने वाली एसआईटी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

संदिग्ध वित्तीय लेन-देन: जाँच में पता चला है कि मंदिर के कई कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी आय से कहीं अधिक नकद जमा और वित्तीय लेन-देन हुआ है। चोरी की इस रकम को रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करने और उससे संपत्ति बनाने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद विस्तृत आर्थिक जांच की सिफारिश की गई है।

सुरक्षा में गंभीर लापरवाही: चढ़ावे की गिनती करने वाले 'गणना कक्ष' में बुनियादी सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। नियमों के बावजूद कर्मचारियों के लिए जेब रहित वर्दी, निजी सामान लाने पर रोक और बायोमीट्रिक हाजिरी जैसी व्यवस्था लागू नहीं की गई थी।

SOP का उल्लंघन: ट्रस्ट और बैंक के बीच तय हुई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया, जिससे चोरी की स्थितियां पैदा हुईं। रिपोर्ट में गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था लागू न करने और गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है।

समीक्षा में कमी: 20 सितंबर 2024 और 6 फरवरी 2025 को ट्रस्ट और बैंक के बीच जारी संयुक्त दिशा-निर्देशों के पालन की जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्रा पर थी, लेकिन उनकी तरफ से नियमित समीक्षा का अभाव पाया गया। इसके अलावा, ऑडिट रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखने के सुझाव को भी नजरअंदाज किया गया।

राहत की बात: इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) पर चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने के जो आरोप लग रहे थे, वे जाँच में झूठे पाए गए हैं। सभी बहुमूल्य वस्तुएं रिकॉर्ड में पूरी तरह सुरक्षित मिली हैं।

3264 करोड़ का ब्योरा: पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक

विवादों के बीच ट्रस्ट ने पारदर्शिता की मिसाल पेश करते हुए स्थापना से लेकर अब तक का पूरा वित्तीय ब्योरा जारी किया है:

मद (Category)प्राप्त राशि (Received)खर्च की गई राशि (Spent)उद्देश्य/स्थिति (Purpose/Status)
कुल प्राप्तियां (समर्पण अभियान व अन्य)₹3,264 करोड़₹2,370 करोड़मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत कार्य
रामलला का चढ़ावा (31 मार्च तक)₹582 करोड़₹391 करोड़मंदिर के संचालन संबंधी कार्य

नोट: खर्च के बाद बची हुई शेष धनराशि ट्रस्ट के बैंक खातों में पूरी तरह सुरक्षित है।

वस्तुगत भेंट का भौतिक सत्यापन: कोषाध्यक्ष के अनुसार, नकद के अलावा श्रद्धालुओं ने अब तक 2926 वस्तुगत भेंट (सोना, चांदी व अन्य उपहार) अर्पित की हैं। इन सभी का तिथि के अनुसार रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज है। हर साल एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्म इनका भौतिक सत्यापन करती है। ट्रस्ट ने कहा है कि यदि कोई श्रद्धालु चाहे, तो वह स्वयं ट्रस्ट से संपर्क कर अपनी दी गई भेंट का सत्यापन कर सकता है।

नए CEO की तलाश: 3 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल कमेटी गठित

ट्रस्ट के कामकाज को पेशेवर और पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए अब नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय चयन समिति का गठन किया गया है, जिसमें शामिल हैं:

न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी

सुरेश हावड़े

यह समिति जल्द ही अपनी सिफारिशें ट्रस्ट के सामने रखेगी, जिसके बाद नए सीईओ के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।