विशेष संवाददाता, रांची:
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में सुरक्षा बलों को एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) से जुड़े 18 सक्रिय नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, ये सभी नक्सली सुरक्षा बलों की निगरानी में सुरक्षित स्थान पर पहुँच चुके हैं।
इनामी कमांडरों और बॉडीगार्ड ने भी डाले हथियार
सरेंडर करने वाले कैडरों में संगठन के कई शीर्ष और इनामी चेहरे शामिल हैं:
15 लाख का इनामी जोनल कमांडर और 10 लाख तक के इनामी रीजनल व सब-जोनल कमांडर स्तर के माओवादी शामिल हैं।
कुख्यात 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली शीर्ष नेता मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड 'शनिचरवा' भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल है।
सभी नक्सलियों की पहचान और संगठन में उनकी भूमिका का आधिकारिक ब्योरा औपचारिक कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक किया जाएगा।
28 जुलाई को रांची में औपचारिक आत्मसमर्पण
जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई को रांची स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित होने वाले एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन सभी 18 नक्सलियों का औपचारिक सरेंडर कराया जाएगा। इस दौरान ये कैडर अपने पास मौजूद भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस के समक्ष सौंपेंगे।
सरेंडर एवं पुनर्वास नीति का असर:
झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के लगातार तेज़ होते अभियानों, शीर्ष नेताओं के मारे जाने तथा प्रभावी पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में नक्सली अब आत्मसमर्पण कर रहे हैं।





