चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक दशक पुराने मारपीट और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट के बहुचर्चित मामले में मनजिंदर सिंह लालपुरा को बड़ी राहत दी है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के फैसले को रद्द करते हुए लालपुरा समेत सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2013 का है, जब एक महिला के साथ मारपीट करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में मनजिंदर सिंह लालपुरा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में एससी-एसटी एक्ट की गंभीर धाराएं भी लगाई गई थीं। निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने सुनवाई के बाद लालपुरा और अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाई कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार: 'आपसी समझौता'
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि पीड़ित पक्ष और आरोपियों के बीच आपसी समझौता हो चुका है। अदालत ने मामले का पुनर्मूल्यांकन करते हुए निम्नलिखित प्रमुख टिप्पणियां कीं:
न्याय का हित: जब दोनों पक्ष विवाद को समाप्त करने पर सहमत हैं, तो सजा को बरकरार रखना न्यायोचित नहीं होगा।
निर्णय की वैधता: समझौते की परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट का पिछला निर्णय अब 'टिकाऊ' नहीं रह गया है।
न्यायिक विवेक: अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में पक्षकारों के बीच सहमति बन जाती है, वहां न्यायिक विवेक का उपयोग कर राहत दी जा सकती है।
रिहाई का रास्ता साफ
हाई कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद करीब 11 साल से चल रही कानूनी खींचतान का अंत हो गया है। अदालत द्वारा सजा रद्द किए जाने के साथ ही मनजिंदर सिंह लालपुरा और अन्य सभी आरोपियों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
"जब विवाद के दोनों पक्ष आपसी सुलह से मामले को खत्म करना चाहते हैं, तो ऐसी स्थिति में मुकदमेबाजी को खींचना न्याय के हित में नहीं है।" - पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट





