कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 'विशेष पहचान अभियान' (SIR) के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलावों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची से कुल 90.82 लाख नाम हटाए गए हैं, जिसका सीधा असर आने वाले चुनावों और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समीकरणों पर पड़ सकता है।

प्रमुख आंकड़े और जनसांख्यिकी (Demographics)

रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची में की गई इस कटौती का सबसे बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती जिलों में देखा गया है:

सीमावर्ती जिलों का हिस्सा: हटाए गए नामों में से 57% से अधिक (लगभग 52.24 लाख) नाम राज्य के 10 सीमावर्ती जिलों (जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना आदि) से हैं।

समुदाय आधारित प्रभाव: सूत्रों के अनुसार, इन सीमावर्ती जिलों में हटाए गए नामों में से 70% से अधिक लोग मुस्लिम समुदाय से हैं।

कारण: चुनाव आयोग के अनुसार, इन क्षेत्रों में लोग आयोग द्वारा निर्धारित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहे।

TMC के लिए चुनावी चुनौती

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय हो सकता है:

मजबूत पकड़: इन 10 जिलों की 151 विधानसभा सीटों में से 2021 में TMC ने 110 सीटें जीती थीं।

जीत का कम अंतर: 2024 के लोकसभा रुझानों के अनुसार, इन क्षेत्रों की 41 सीटों पर TMC की बढ़त 20,000 वोटों से कम थी।

गणित का खेल: इन सीटों पर औसतन 30,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। चूंकि हटाए गए मतदाताओं में एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय का है (जो परंपरागत रूप से TMC का समर्थक रहा है), ऐसे में कम मार्जिन वाली सीटों पर हार-जीत का अंतर पलट सकता है।

कोलकाता का समीकरण

राजधानी कोलकाता की 11 सीटों पर भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है:

कोलकाता में कुल 24.13 लाख मतदाताओं में से 6.97 लाख नाम हटा दिए गए हैं।

भवानीपुर (8,297 मार्जिन), रासबिहारी (1,691 मार्जिन) और मानिकतला (3,575 मार्जिन) जैसी सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से कहीं अधिक है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और नैरेटिव

भाजपा का रुख: भाजपा नेताओं, जिनमें किरीट सोमैया भी शामिल हैं, ने इसे अपनी वैचारिक जीत बताया है। उनका दावा है कि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या उन 'अवैध बांग्लादेशियों' की है जिनका नाम राजनीतिक लाभ के लिए सूची में जोड़ा गया था। पार्टी का मानना है कि इससे सीमावर्ती जिलों में उनकी स्थिति मजबूत होगी।

TMC की चिंता: यदि इन 151 सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन गिरता है, तो राज्य की सत्ता पर दोबारा काबिज होने की उसकी राह कठिन हो सकती है।

निष्कर्ष: 90 लाख मतदाताओं का बाहर होना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बंगाल की चुनावी बिसात को पूरी तरह बदलने वाला कदम साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि क्या ये 'हटाए गए' मतदाता अपनी नागरिकता साबित कर वापस सूची में जुड़ पाते हैं या नहीं।