कोलकाता | विशेष संवाददाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा दांव खेला है। राज्य बजट में घोषित दो महत्वाकांक्षी योजनाओं— 'बांग्लार युवा साथी' और 'भूमिहीन खेत मजदूर' को ममता सरकार ने निर्धारित समय (1 अप्रैल) से पहले आज यानी 7 मार्च से ही लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्य के विकास में किसी भी प्रकार की देरी नहीं चाहतीं।
युवाओं और मजदूरों के लिए बड़ी सौगात
ममता बनर्जी ने आज इन योजनाओं का शुभारंभ करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य राज्य के युवाओं और गरीब मजदूरों को सीधा आर्थिक संबल प्रदान करना है।
बांग्लार युवा साथी: इस योजना के तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता तब तक मिलेगी जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल जाता (अधिकतम 5 वर्ष)।
भूमिहीन खेत मजदूर: इस योजना के जरिए उन मजदूरों को वित्तीय सहायता दी जाएगी जिनके पास अपनी कृषि भूमि नहीं है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें।
"बंगाल को बदनाम कर रहा है केंद्र"
योजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की लोक-कल्याणकारी योजनाओं की सफलता से केंद्र घबराया हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा:
"हमारा राज्य कई योजनाओं को लागू करने में देश में नंबर-1 है, लेकिन केंद्र सरकार लगातार बंगाल को बदनाम करने की साजिश रच रही है। हमें परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।"
चुनावी बिसात और 'SIR' पर तकरार
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राज्य में विशेष गहन संशोधन (SIR) और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग/केंद्र के बीच ठनी हुई है। ममता बनर्जी कल से ही कोलकाता के एस्प्लेनेड में धरने पर बैठी हैं, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर बंगाल के वैध मतदाताओं का अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं।
वर्तमान राजनीतिक माहौल
चुनाव आयोग की टीम वर्तमान में पश्चिम बंगाल के दौरे पर है और माना जा रहा है कि 10 मार्च के बाद कभी भी विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो सकता है। ऐसे में ममता बनर्जी द्वारा योजनाओं को समय से पहले लागू करना उनकी चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।





