कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर 'धरना पॉलिटिक्स' का दौर लौट आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की संशोधित मतदाता सूची (SIR) से लाखों नाम हटाए जाने के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को उनके धरने का दूसरा दिन है। शुक्रवार की पूरी रात मुख्यमंत्री ने एस्प्लेनेड स्थित मेट्रो चैनल पर बने धरना स्थल पर ही बिताई, जहाँ उनके साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दिग्गज नेता और विधायक भी डटे हुए हैं।

विवाद की जड़: मतदाता सूची में बड़ी कटौती

यह पूरा विवाद 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के बाद शुरू हुआ है।

63 लाख से अधिक नाम कटे: पिछले साल नवंबर में शुरू हुई 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से करीब 63.66 लाख नाम (कुल मतदाताओं का लगभग 8.3%) हटा दिए गए हैं।

मतदाताओं की संख्या में गिरावट: राज्य में कुल मतदाताओं का आंकड़ा 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गया है।

संदेह के घेरे में 60 लाख मतदाता: इसके अतिरिक्त, लगभग 60.06 लाख मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (विचाराधीन) श्रेणी में रखा गया है, जिनकी वोट देने की पात्रता कानूनी जांच के बाद ही तय होगी।

ममता बनर्जी के गंभीर आरोप: "बंगाल को बांटने की साजिश"

धरना स्थल से समर्थकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखे प्रहार किए। उनके भाषण के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

"वोटर लिस्ट से नाम हटाना बंगाल को बांटने और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की एक बड़ी योजना है। भाजपा अन्य राज्यों में बंगाली भाषियों को परेशान कर रही है और अब बंगाल के भीतर ही उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।"

राजनीतिक समीकरणों पर असर

जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने और 'विचाराधीन' श्रेणी में रखे जाने से कई विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ममता बनर्जी ने इसे "वोट छीनने की योजना" करार देते हुए साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं हैं।

मुख्य आंकड़े एक नज़र में

श्रेणीविवरण
हटाए गए कुल नाम63.66 लाख (8.3%)
वर्तमान कुल मतदाता~7.04 करोड़
विचाराधीन मतदाता60.06 लाख
धरना स्थलमेट्रो चैनल, एस्प्लेनेड (कोलकाता)