मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के खप्परपुर गांव में हुए चार कत्ल और खुदकुशी के मामले ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जैसे-जैसे पुलिस की जाँच आगे बढ़ रही है, इस खौफनाक वारदात के पीछे 'तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास' की काली छाया साफ नजर आने लगी है। घर के भीतर से मिले साक्ष्यों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि मुख्य आरोपी मनीष पूरी तरह से रहस्यमयी अनुष्ठानों की गिरफ्त में था।
कमरा बना था 'भगतई' का केंद्र
जाँच के दौरान मनीष के कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस और ग्रामीण हैरान रह गए। कमरे में फ्रिज के ऊपर से लेकर कोनों तक तंत्र-मंत्र का सामान बिखरा पड़ा था।
मिले साक्ष्य: भारी मात्रा में जायफल, हवन सामग्री, लोहवान, मोरपंख और मन्नत की दर्जनों पोटलियां बरामद हुई हैं।
आयुर्वेदिक पर्चा: फ्रिज पर एक कागज चिपका मिला है, जिस पर विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के नाम लिखे थे। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष अब खुद भी 'भगतई' और झाड़-फूंक के जरिए इलाज करने का दावा करने लगा था।
कामकाज छोड़कर 'बाबा' की शरण में था मनीष
मनीष के भाई सुधीर और चाचा भगवान सिंह ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। परिजनों के अनुसार:
सामाजिक दूरी: मनीष ने लोगों से बातचीत करना लगभग बंद कर दिया था। वह केवल सुबह-शाम मंदिर के एक पुजारी के पास जाता था।
आर्थिक बर्बादी: उसने खेती-किसानी और कामकाज पूरी तरह छोड़ दिया था। यहाँ तक कि खेत पर मौजूद ट्यूबवेल, जिसका पानी बेचकर कमाई होती थी, उसे भी बंद कर दिया गया था।
दिनचर्या: उसका पूरा समय मंदिर की सेवा और तांत्रिक गतिविधियों में बीतने लगा था।
पुजारी की भूमिका शक के घेरे में
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि मनीष गांव के बाहर भी एक पुजारी के साथ अक्सर आता-जाता देखा गया था। आशंका जताई जा रही है कि किसी विशेष 'सिद्धि' या अनुष्ठान के चक्कर में मनीष ने इस आत्मघाती कदम को अंजाम दिया, जिसमें उसके परिवार के चार सदस्यों की बलि चढ़ गई।
पुलिस का बयान: "मौके से मिले साक्ष्य तंत्र-मंत्र की ओर इशारा कर रहे हैं। हम उस पुजारी और मनीष के संपर्क में रहे अन्य लोगों की तलाश कर रहे हैं ताकि इस सामूहिक हत्या और आत्महत्या के पीछे की असली वजह का पता चल सके।"





