नालंदा (नगरनौसा)। बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड से एक बेहद हैरान और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है। यहां के मध्य विद्यालय 'कला कैला' में बुधवार को मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) खाने के बाद तीन दर्जन से अधिक बच्चे अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए। भोजन करने के महज कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और सिर चकराने की शिकायत होने लगी, जिसके बाद स्कूल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
सब्जी की प्लेट में 'मौत का सामान': छात्रा का बड़ा खुलासा
अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही पांचवीं कक्षा की छात्रा अमृता कुमारी ने घटना की खौफनाक दास्तान बयां की। अमृता के अनुसार:
थाली में संदिग्ध वस्तु: दोपहर के भोजन में बच्चों को चावल और चने (छोले) की सब्जी परोसी गई थी। खाना खाने के दौरान सब्जी के भीतर एक संदिग्ध ‘गोली’ जैसी वस्तु दिखाई दी।
शिक्षकों की लापरवाही: छात्राओं का गंभीर आरोप है कि रोज की स्थापित गाइडलाइंस के विपरीत, बुधवार को भोजन परोसने से पहले किसी भी शिक्षक ने खाने की जांच या उसका स्वाद नहीं चखा था।
शिक्षक भी हुए शिकार: बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद जब 'अमरेश सर' नामक शिक्षक ने उसी भोजन को चखा, तो कुछ ही देर में उनका सिर भी चकराने लगा। हालत बिगड़ने पर उन्हें भी तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
कई बच्चे खाकर गिरे चक्कर, चंडी रेफरल अस्पताल भेजे गए गंभीर मरीज
खाना खाने के बाद कई बच्चे दर्द से तड़पने लगे और कुछ तो स्कूल के बरामदे में ही बेहोश होकर गिर पड़े। घटना की खबर जंगल में आग की तरह फैली और सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित ग्रामीण व अभिभावक स्कूल पहुंच गए।
प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से सभी बीमार बच्चों को आनन-फानन में नगरनौसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, कई बच्चों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी, जिसके कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत 'चंडी रेफरल अस्पताल' रेफर कर दिया गया है।
'एकता फाउंडेशन' के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
इस पूरे हादसे के बाद मिड-डे मील की आपूर्ति करने वाली एनजीओ ‘एकता फाउंडेशन’ के खिलाफ ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
| घटना से जुड़े मुख्य बिंदु | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| आपूर्ति कर्ता | एकता फाउंडेशन (संस्था) |
| प्रधानाध्यापिका का बयान | रजनी कुमारी (प्रधानाध्यापिका) के अनुसार, जैसे ही बच्चों ने छोला-चावल खाना शुरू किया, वैसे ही वे बेहोश होने लगे। |
| प्रशासनिक कार्रवाई | शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत भेज दी गई है। खाने के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। |
परिजनों का सीधा आरोप है कि बिना किसी क्वालिटी चेक और घटिया दर्जे की खाद्य सामग्री के कारण बच्चों की जान दांव पर लगाई गई। ग्रामीणों ने दोषी संस्था का टेंडर रद्द करने और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।





