भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में फर्जी डिग्री के सहारे मासूम मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले कथित डॉक्टरों के खिलाफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। एनएचएम की शुरुआती जांच और मुस्तैदी के बाद प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से 9 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं। विभाग ने बिना वक्त गंवाए इन सभी कथित डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

यही नहीं, इन्हें क्लीनिक से सीधे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए संबंधित जिलों के थानों में धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर (FIR) भी दर्ज करा दी गई है।

दमोह से शुरू हुआ 'ऑपरेशन क्लीन', भोपाल तक हड़कंप

इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा सबसे पहले दमोह जिले से हुआ था। दमोह में पहला मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया। इसके तुरंत बाद प्रदेश भर के संजीवनी क्लीनिकों और सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी (बारीक जांच) शुरू कर दी गई, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

अब तक की कार्रवाई: दमोह का मामला उजागर होने के बाद अब तक 81 डॉक्टरों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच पूरी की जा चुकी है।

भोपाल में ताबड़तोड़ छापेमारी: राजधानी भोपाल के संजीवनी क्लीनिकों में भी स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें मुस्तैदी से जांच कर रही हैं। विभाग का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सरकारी या संविदा केंद्र पर कोई भी अयोग्य व्यक्ति प्रैक्टिस न कर सके।

अभी और गिरेंगी गाज: 10 और संदिग्ध डॉक्टर रडार पर

स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो यह तो सिर्फ शुरुआत है; जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही फर्जी डॉक्टरों का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग ने 10 और संदिग्ध डॉक्टरों की सूची तैयार की है, जिनकी डिग्रियां और मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन नंबर गहरे संदेह के घेरे में हैं। संभावना है कि अगले कुछ दिनों में इनके दस्तावेजों की जांच पूरी होते ही इस फर्जीवाड़े का दूसरा आधिकारिक खुलासा भी हो जाएगा।

सभी संविदा डॉक्टरों की होगी नए सिरे से जांच, सीधे जेल भेजने की तैयारी

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत सभी संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की नए सिरे से स्क्रूटनी करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है:

नो टॉलरेंस पॉलिसी: स्वास्थ्य जैसी अति-संवेदनशील सेवा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कड़ी वैधानिक कार्रवाई: यदि जांच के दौरान किसी भी डॉक्टर के दस्तावेज फर्जी या संदिग्ध पाए जाते हैं, तो उन्हें न केवल नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि उनके खिलाफ सख्त कानूनी धाराएं लगाकर जेल भेजने की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, भोपाल।