हैदराबाद: पैसे और संपत्ति के अंधे लालच में रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी खौफनाक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे समाज को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत ने सोमवार (8 जून) को 2019 के एक बेहद चर्चित और जघन्य हत्याकांड पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) रेलवे कर्मचारी की हत्या के जुर्म में उनके सगे बेटे और बेटी को 'सजा-ए-मौत' (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है, जबकि मृतक की पत्नी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा दी गई है।

मल्काजगिरि स्थित न्यायालय के प्रधान जिला न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया और यह कड़ा फैसला सुनाया।

पेंशन और मकान हड़पने के लिए रची खौफनाक साजिश

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 70 वर्षीय मृतक रेलवे कर्मचारी साल 2000 तक मालगाड़ी के चालक (गुड्स ट्रेन ड्राइवर) के रूप में कार्यरत थे, जिन्होंने बाद में चिकित्सीय कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। उन्हें मिलने वाली मासिक पेंशन और उनके मकान पर कब्जा करने के लिए उनके ही परिवार ने मौत का यह खौफनाक ताना-बाना बुना:

भोजन में दिया जहर: पत्नी, 47 वर्षीय बेटे और 36 वर्षीय बेटी ने मिलकर बुजुर्ग के भोजन में जहर मिला दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

बाल्टियों में छिपाए लाश के टुकड़े: हत्या के बाद जब आरोपी शव को आसानी से ठिकाने नहीं लगा पाए, तो उन्होंने बेरहमी से लाश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और उन्हें घर के भीतर ही प्लास्टिक की बाल्टियों में भरकर रख दिया।

अपराध और न्याय का घटनाक्रम (Timeline)

तारीखघटनाक्रम
18 अगस्त, 2019बंद घर से असहनीय दुर्गंध आने के बाद स्थानीय निवासियों ने शक होने पर अंदर प्रवेश किया, जहाँ उन्हें मानव अवशेष (शव के टुकड़े) मिले। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
21 अगस्त, 2019पुलिस ने गहन जांच के बाद मृतक की पत्नी, बेटे और बेटी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
8 जून, 2026कोर्ट ने अपराध को 'क्रूरतम' मानते हुए दोनों बच्चों को फांसी की सजा और मां को उम्रकैद सुनाई।

एक सामाजिक आत्ममंथन की जरूरत

पैसों की हवस में अपनों का ही खून बहाने की तेलंगाना से सामने आई इस घटना ने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया है। यह फैसला जहाँ अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करेगा, वहीं बतौर समाज हमें यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि चंद रुपयों और प्रॉपर्टी के लिए कोई इतना अंधा कैसे हो सकता है? कोर्ट के इस कड़े रुख की चारों तरफ सराहना हो रही है।