नासिक | नासिक में 'फर्जी बाबा' अशोक खरात के खिलाफ चल रही जांच अब केवल शोषण के आरोपों तक सीमित नहीं रह गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आयकर विभाग (Income Tax Department) भी इस प्रकरण में एंट्री करने की तैयारी में है। वहीं, दूसरी ओर तीन और महिलाओं के सामने आने से खरात की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
वित्तीय साम्राज्य पर 'आयकर' की नजर
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग जल्द ही अशोक खरात के वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच शुरू कर सकता है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:
आय के स्रोत: विभाग खरात के बैंक ट्रांजैक्शन्स, निवेश और बेनामी संपत्तियों के रिकॉर्ड खंगालेगा।
फंडिंग और डोनर्स: जांच का दायरा केवल खरात तक सीमित नहीं रहेगा। उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें बड़ी रकम 'दान' या 'फंडिंग' के रूप में दी थी।
संपत्ति की वैधता: खरात द्वारा खरीदी गई जमीनों और इमारतों के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे की वैधता की जांच होगी। यदि धन का स्रोत अवैध पाया गया, तो संपत्तियों को कुर्क (Attach) किया जा सकता है।
बढ़ता जा रहा है आरोपों का अंबार
मामले में हर बीतते दिन के साथ नए खुलासे हो रहे हैं, जो इस पूरे सिंडिकेट की पोल खोल रहे हैं:
तीन नई शिकायतें: तीन और महिलाओं ने खरात के खिलाफ सामने आकर आपबीती सुनाई है। बताया जा रहा है कि इन महिलाओं का पहले विश्वास जीता गया और फिर उनका शोषण किया गया।
100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो: विशेष जांच दल (SIT) के हाथ ऐसे 100 से ज्यादा वीडियो लगे हैं, जो महिलाओं के शोषण और ब्लैकमेलिंग की ओर इशारा करते हैं। ये वीडियो मामले में सबसे ठोस सबूत माने जा रहे हैं।
SIT की कार्रवाई: एसआईटी फिलहाल बेहद गोपनीय तरीके से साक्ष्य जुटा रही है। टीम को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कुछ 'सफेदपोश' मददगारों के नाम भी उजागर हो सकते हैं।
मामले का अब तक का घटनाक्रम (Status Check)
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| मुख्य आरोपी | अशोक खरात (हिरासत/जांच के दायरे में) |
| जांच एजेंसियां | पुलिस, SIT और अब आयकर विभाग की संभावित एंट्री। |
| पीड़ितों की संख्या | लगातार बढ़ रही है (ताजा मामले में 3 और महिलाएं शामिल)। |
| सबूतों की प्रकृति | डिजिटल साक्ष्य (वीडियो), बैंक रिकॉर्ड्स और गवाहों के बयान। |
निष्कर्ष: बड़ा खुलासा होने की उम्मीद
अशोक खरात के खिलाफ दर्ज मामलों में जिस तरह से 'फंडिंग' और 'शोषण' के तार जुड़ रहे हैं, उससे साफ़ है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं बल्कि एक सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा 'फर्जीवाड़ा' है। आयकर विभाग की सक्रियता से अब उन लोगों के चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं जो पर्दे के पीछे से इस साम्राज्य को खाद-पानी दे रहे थे।





