चंडीगढ़ में बुजुर्ग असुरक्षित: अपराध दर में दिल्ली को पछाड़कर देश में नंबर-1 बना 'सिटी ब्यूटीफुल'
चंडीगढ़: 'रिटायर्ड लोगों के स्वर्ग' के रूप में जाना जाने वाला चंडीगढ़ अब बुजुर्गों के लिए देश का सबसे असुरक्षित शहर बनकर उभरा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध दर (Crime Rate) देश में सबसे अधिक है, जो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से भी कहीं ज्यादा है।
आंकड़ों की जुबानी: चंडीगढ़ की चिंताजनक तस्वीर
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ में प्रति लाख बुजुर्ग आबादी पर 211 अपराध दर्ज किए जा रहे हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो:
| स्थान | अपराध दर (प्रति लाख आबादी पर) |
|---|---|
| चंडीगढ़ | 211 |
| दिल्ली | 110 |
| मध्य प्रदेश | 102 |
चंडीगढ़ में लगभग 0.7 लाख बुजुर्ग आबादी है और साल 2024 में यहां कुल 142 आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
5 वर्षों में 230% की भयावह वृद्धि
पिछले पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ी है। साल 2020 में जहां बुजुर्गों से जुड़े मात्र 43 मामले सामने आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 142 हो गई है। यानी केवल पांच वर्षों में अपराधों में 230 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
साइबर ठगी और 'डिजिटल अरेस्ट': नए जमाने के हथियार
रिपोर्ट में साफ है कि बुजुर्गों को शारीरिक हिंसा से ज्यादा आर्थिक और मानसिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। अकेलेपन का फायदा उठाकर ठग उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर फ्रॉड का शिकार बना रहे हैं।
ठगी के चौंकाने वाले मामले:
₹2.5 करोड़ की ठगी: एक 82 वर्षीय महिला को TRAI और CBI अधिकारी बनकर डराया गया और डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए गए।
पूर्व चीफ आर्किटेक्ट भी शिकार: चंडीगढ़ की पूर्व चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर को भी डिजिटल अरेस्ट के जरिए ₹2.5 करोड़ का चूना लगाया गया।
भावनात्मक ब्लैकमेल: सेक्टर-36 के एक बुजुर्ग से उनके बेटे की गिरफ्तारी का डर दिखाकर ₹1.12 करोड़ ठग लिए गए।
क्यों आसान शिकार बन रहे हैं बुजुर्ग?
अकेलापन: चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले रहते हैं या घरेलू नौकरों के भरोसे हैं।
तकनीकी जानकारी का अभाव: साइबर ठग तकनीक का डर दिखाकर आसानी से बुजुर्गों को झांसे में ले लेते हैं।
डिजिटल अरेस्ट का खौफ: पुलिस या सरकारी एजेंसी का फर्जी डर दिखाकर बुजुर्गों को घंटों कैमरे के सामने कैद रहने पर मजबूर किया जाता है।
सावधानी ही बचाव है
प्रशासन और पुलिस विभाग लगातार बुजुर्गों को जागरूक कर रहे हैं कि वे किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।





