जमुई:

बिहार के जमुई जिले में श्रम विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। विभाग में मुआवजे की सरकारी राशि हड़पने के लिए एक ऐसा खेल चल रहा है, जहाँ फाइलों में इंसानों को एक नहीं, बल्कि दो-दो बार "मृत" दिखाया जा रहा है। गुलो तांती के चर्चित मामले के बाद अब बरहट प्रखंड का लखन रविदास प्रकरण सामने आने से विभाग में भ्रष्टाचार के गहरे जाल की पोल खुल गई है।

2019 में हुई मौत, कागज़ों में 2025 में फिर मार दिया! ताज़ा मामला बरहट प्रखंड की लखई पंचायत स्थित भंदरा गांव का है। यहाँ के निवासी लखन रविदास का निधन 23 मई 2019 को हुआ था। उस समय पंचायत द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर उनकी पत्नी सावित्री देवी को नियमित रूप से विधवा पेंशन भी मिल रही है। लेकिन भ्रष्टाचार के सिंडिकेट ने इसी प्रमाण पत्र में हेरफेर कर लखन की मौत की फर्जी तारीख 29 जुलाई 2025 दर्शा दी और दिसंबर 2025 में 2 लाख रुपये के मुआवजे की अवैध निकासी कर ली।

जल्दबाजी में छूटे जालसाजी के सुराग जालसाजों ने मूल मृत्यु प्रमाण पत्र को ही एडिट कर नई तारीख दर्ज की, लेकिन हड़बड़ी में बड़ी चूक कर बैठे। संपादित प्रमाण पत्र में अंकों में मृत्यु की तारीख भले ही 29 जुलाई 2025 कर दी गई, लेकिन शब्दों में मृत्यु की तिथि '23 मई 2019' ही दर्ज रह गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए रजिस्ट्रेशन नंबर और जारी करने की तारीख बदलकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

गुलो तांती केस में भी यही पैटर्न: मरणोपरांत रिन्यू हुआ लेबर कार्ड इससे पहले गिद्धौर प्रखंड की गुगुलडीह पंचायत के छेदलाही गांव निवासी गुलो तांती के मामले में भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा देखने को मिला था। गुलो तांती की वास्तविक मौत 20 दिसंबर 2023 को हुई थी। लेकिन मुआवजा हड़पने के लिए 9 फरवरी 2024 की तारीख वाला एक और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाया गया। हैरत की बात यह है कि मौत के बाद 1 फरवरी 2024 को उनका लेबर कार्ड रिन्यू किया गया और 2,05,000 रुपये की राशि निकाल ली गई।

सवाल पूछने पर गोलमोल जवाब, श्रम अधीक्षक मौन इस बड़े घोटाले को लेकर जब बरहट प्रखंड के श्रम निरीक्षक सुधांशु कुमार से संपर्क किया गया, तो वे पहले टालमटोल करते रहे और फिर पोर्टल न खुलने का बहाना बनाने लगे। वहीं, पूरे मामले पर श्रम अधीक्षक रतीश कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

दलालों और अधिकारियों की सांठगांठ से बंदरबांट: आरटीआई कार्यकर्ता मामले पर आरटीआई कार्यकर्ता गिरीश सिंह और भाकपा माले नेता बाबू साहब सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि श्रम विभाग में ऐसे दर्जनों मामले दबे पड़े हैं। दलालों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं के पैसों की सरेआम बंदरबांट की जा रही है। पूर्व के मामलों में जांच का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक फाइलें धूल फांक रही हैं।