कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया एक संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गई है। राज्य प्रशासन और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट के प्रकाशन को फिलहाल टाल दिया है। अब यह सूची शुक्रवार के बजाय अगले सप्ताह जारी की जाएगी।
हाईकोर्ट और प्रशासन की अहम बैठक
यह महत्वपूर्ण निर्णय गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई आधे घंटे की बैठक में लिया गया। इस बैठक में नवनियुक्त गृह सचिव संघमित्रा घोष, डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता और कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नंद मौजूद थे।
निर्णय के पीछे के मुख्य कारण:
नाम हटने की संभावना: न्यायिक अधिकारियों द्वारा किए जा रहे 'एडजुडिकेशन' (न्यायिक निर्णय) के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की संभावना है।
सुरक्षा और पर्व: प्रशासन का मानना है कि नाम कटने से कुछ क्षेत्रों में तनाव पैदा हो सकता है। साथ ही, शनिवार को एक विशेष समुदाय का त्योहार होने के कारण सुरक्षा कारणों से इस प्रक्रिया को अगले हफ्ते तक टालना ही बेहतर समझा गया।
20 लाख मतदाताओं का भाग्य अगले हफ्ते होगा स्पष्ट
सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 25 लाख त्रुटिपूर्ण (discrepancy) मतदाता फॉर्मों की जांच पूरी हो चुकी है।
पहली सूची: अगले हफ्ते आने वाली पहली सूची में उन 20 लाख मतदाताओं के नाम होंगे जिनकी जांच कुछ दिन पहले ही पूरी हुई है।
अस्वीकृति की दर: जिला स्तर के सूत्रों का दावा है कि 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' श्रेणी के तहत लगभग 40 प्रतिशत मतदाताओं के आवेदनों को न्यायिक अधिकारियों ने खारिज कर दिया है। यह उच्च दर ही प्रशासन की चिंता का मुख्य विषय है।
चुनाव आयोग का सख्त कदम: 5 पूर्व जिलाधिकारियों को भेजा तमिलनाडु
निर्वाचन आयोग (EC) ने बंगाल चुनाव में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने उन पांच जिलाधिकारियों (DMs) को तमिलनाडु में 'जनरल ऑब्जर्वर' बनाकर भेज दिया है, जिन्हें हाल ही में उनके पदों से हटाया गया था।
अधिकारी: दक्षिण 24 परगना, पूर्व वर्धमान, बांकुरा, मालदा और जलपाईगुड़ी के पूर्व जिलाधिकारियों को राज्य से बाहर भेजा गया है।
उद्देश्य: आयोग को आशंका थी कि ये अधिकारी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर तब जब राज्य सरकार ने उन्हें चुनाव बाद पुरानी पोस्टिंग पर वापस भेजने के संकेत दिए थे।
वोटर लिस्ट की वर्तमान स्थिति
28 फरवरी की स्थिति: आयोग ने 6.44 करोड़ मतदाताओं की प्रारंभिक अंतिम सूची जारी की थी, जबकि 60.06 लाख मतदाता न्यायिक जांच के अधीन थे।
जांच की रफ्तार: वर्तमान में 705 न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन 1.5 लाख से 2 लाख मामलों का निपटारा कर रहे हैं।
अंतिम तिथि: नामांकन की आखिरी तारीख (6 अप्रैल और 9 अप्रैल) तक पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
एक नज़र में मुख्य आंकड़े
| विवरण | सांख्यिकी / तिथि |
|---|---|
| पहली सप्लीमेंट्री सूची का प्रकाशन | अगले सप्ताह |
| जांच पूरी हो चुके मतदाता | 25 लाख |
| पहली सूची में शामिल मतदाता | 20 लाख |
| अनुमानित रिजेक्शन दर | लगभग 40% |
| बंगाल चुनाव की तारीखें | 23 और 29 अप्रैल |
निष्कर्ष
प्रशासन और न्यायपालिका का यह तालमेल बताता है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के साथ-साथ राज्य में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अगले हफ्ते आने वाली सूची न केवल चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगी, बल्कि प्रशासनिक मुस्तैदी की भी परीक्षा होगी।





