चंडीगढ़/अमृतसर: पंजाब की राजनीति में शनिवार को उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया जब कैबिनेट मंत्री लालजीत भुल्लर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के अमृतसर डीएम (मैनेजर) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में नाम उछलने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ा रुख अपनाते हुए भुल्लर से इस्तीफा मांग लिया।

क्या है पूरा मामला?

अमृतसर वेयरहाउस के मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में सल्फास निगल लिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल भर्ती कराया गया, जहाँ शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मरने से पहले रंधावा ने एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो सामने आते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई और सरकार बैकफुट पर आ गई।

मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: "जांच प्रभावित नहीं होने देंगे"

इस्तीफा स्वीकार करने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के मामलों में उनकी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है। उन्होंने कहा:

"हमने कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा ले लिया है क्योंकि हम किसी भी कीमत पर जांच को प्रभावित नहीं होने दे सकते। हम सत्ता में अधिकारियों को तंग करने के लिए नहीं आए हैं। कानून अपना काम करेगा।"

विपक्ष के निशाने पर सरकार: गिरफ्तारी की मांग तेज

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है:

कांग्रेस की मांग: वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैरा ने सोशल मीडिया (X) पर मोर्चा खोलते हुए भुल्लर की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री और उनके करीबियों ने रंधावा के साथ मारपीट की और उन्हें मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

सांसद औजला का वार: अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

अकाली दल का हमला: बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखे प्रहार किए और इसे सत्ता का दुरुपयोग बताया।

पुलिस जांच और आगामी कार्रवाई

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और सुसाइड वीडियो को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा है। अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट और वीडियो के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रताड़ना का स्तर क्या था और इसमें कौन-कौन शामिल थे।

क्या है पूरा मामला?

अमृतसर वेयरहाउस के मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में सल्फास निगल लिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल भर्ती कराया गया, जहाँ शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मरने से पहले रंधावा ने एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो सामने आते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई और सरकार बैकफुट पर आ गई।

मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: "जांच प्रभावित नहीं होने देंगे"

इस्तीफा स्वीकार करने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के मामलों में उनकी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है। उन्होंने कहा:

"हमने कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा ले लिया है क्योंकि हम किसी भी कीमत पर जांच को प्रभावित नहीं होने दे सकते। हम सत्ता में अधिकारियों को तंग करने के लिए नहीं आए हैं। कानून अपना काम करेगा।"

विपक्ष के निशाने पर सरकार: गिरफ्तारी की मांग तेज

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है:

कांग्रेस की मांग: वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैरा ने सोशल मीडिया (X) पर मोर्चा खोलते हुए भुल्लर की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री और उनके करीबियों ने रंधावा के साथ मारपीट की और उन्हें मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

सांसद औजला का वार: अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

अकाली दल का हमला: बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखे प्रहार किए और इसे सत्ता का दुरुपयोग बताया।

पुलिस जांच और आगामी कार्रवाई

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और सुसाइड वीडियो को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा है। अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट और वीडियो के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रताड़ना का स्तर क्या था और इसमें कौन-कौन शामिल थे।