चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिझागा वेत्री कड़गम (TVK) अब राज्य में सरकार बनाने के मुहाने पर खड़ी है। ताज़ा घटनाक्रम में, वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) ने टीवीके को अपना समर्थन देने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बहुमत के जादुई आंकड़े (118) को पार कर लिया है।
राजभवन में बढ़ी हलचल: राज्यपाल का दौरा रद्द
सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर (जिन्हें केरल का अतिरिक्त प्रभार भी प्राप्त है) ने अपना शाम 7:10 बजे का केरल दौरा अचानक रद्द कर दिया। इससे पहले, राजभवन ने विजय को अपॉइंटमेंट देने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि राज्यपाल का कार्यक्रम पहले से तय है।
अब दौरा कैंसिल होने के बाद विजय अपने घर से लोकभवन (राजभवन) के लिए निकल चुके हैं। माना जा रहा है कि वे समर्थन पत्रों के साथ राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
समर्थन का गणित: 121 सीटों के साथ विजय मजबूत
वीसीके (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन के साथ टीवीके गठबंधन की ताकत अब बहुमत के आंकड़े से ऊपर निकल गई है। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों दल पहले डीएमके (DMK) के सहयोगी रहे हैं।
सीटों का पूरा समीकरण:
| पार्टी | सीटें |
|---|---|
| TVK | 108 (प्रभावी संख्या 107) |
| कांग्रेस | 05 |
| CPI | 02 |
| CPI (M) | 02 |
| VCK | 02 |
| IUML | 02 |
| कुल योग | 121 (बहुमत के लिए 118 जरूरी) |
थिरुमावलवन के समर्थन से बदली तस्वीर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित और बहुजन राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाने वाले थिरुमावलवन (VCK) का समर्थन विजय के लिए 'गेम चेंजर' साबित हुआ है। सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों पर दोनों दलों की नजदीकी ने राज्य में एक नए राजनीतिक ध्रुवीकरण को जन्म दिया है।
कार्यकर्ताओं में जश्न, 'फिल्मी' हुआ राजनीतिक सीन
बहुमत का आंकड़ा पार होने की खबर मिलते ही पूरे तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में विजय ने तीन बार राज्यपाल से मुलाकात की थी, लेकिन तब तक समर्थन पत्र पूरे न होने के कारण दावा स्वीकार नहीं किया गया था। अब जिस तरह आखिरी पलों में राज्यपाल का दौरा रद्द हुआ और विजय राजभवन की ओर निकले, उसने इस पूरी राजनीतिक लड़ाई को विजय की फिल्मों जैसा रोमांचक बना दिया है।
निष्कर्ष:
यदि आज रात राज्यपाल विजय के दावे को स्वीकार कर लेते हैं, तो तमिलनाडु में दशकों पुराने द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक ढांचे के बीच एक नया अध्याय शुरू होगा। सबकी नज़रें अब लोकभवन पर टिकी हैं।





