अयोध्या।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के बाद पहला बड़ा कानूनी एक्शन हुआ है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या थाने में 8 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चोरी करते दिखे आरोपियों और उनकी मदद करने वालों को इस एफआईआर में घेरा गया है। हालांकि, इस पहली एफआईआर में चंपत राय या अनिल मिश्रा जैसा कोई बड़ा नाम शामिल नहीं है। आरोपियों में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा और मंदिर के 6 कैशियर शामिल हैं।
इन सख्त धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा, हो सकती है उम्रकैद
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आइए जानते हैं कि किस धारा के तहत कितनी सजा का प्रावधान है:
धारा 316(5) (अपराधिक न्यासभंग): किसी कर्मचारी या भरोसे के व्यक्ति द्वारा संपत्ति/धन के गबन का यह गंभीर मामला है। इसमें आजीवन कारावास (उम्रकैद) या 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 317(4) (चोरी की संपत्ति का कारोबार): यह जानते हुए भी कि संपत्ति चोरी की है, उसे आदतन खरीदना या रखना। इसमें भी आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है।
धारा 317(5) (चोरी का माल ठिकाने लगाना): चोरी की संपत्ति को छिपाने या बेचने में मदद करना। इसके तहत 3 वर्ष तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।
धारा 61 (अपराधिक साजिश): दो या दो से अधिक लोगों द्वारा मिलकर किसी अपराध को अंजाम देने की साजिश रचना।
धारा 3(5) (समान उद्देश्य से सामूहिक अपराध): समूह में मिलकर किए गए अपराध के लिए सभी की बराबर जिम्मेदारी तय करना।
आक्रोश में विश्व हिंदू परिषद, अयोध्या की बैठक में उठीं 4 बड़ी मांगें
चढ़ावा चोरी के इस संवेदनशील मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) बेहद आक्रामक और आक्रोशित है। इस घटना से रामभक्तों की आस्था को पहुंची ठेस को देखते हुए अयोध्या में वीएचपी की एक हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें संगठन के 5 बड़े शीर्ष सदस्य मौजूद रहे। इस बैठक में आगे की रणनीति को लेकर गहन मंथन हुआ।
टीवी9 (TV9) से बातचीत करते हुए वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने दो टूक कहा कि चोरी करने वालों को हर हाल में जेल भेजा जाना चाहिए। इसके साथ ही वीएचपी ने सरकार और प्रशासन के सामने 4 प्रमुख मांगें रखी हैं:
तत्काल FIR: कानूनी कार्रवाई के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए (जो कि प्रशासन द्वारा पूरी कर ली गई है)।
तेज जांच: मंदिर से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम और सभी मामलों की त्वरित जांच हो ताकि पूरा सच देश के सामने आ सके।
फास्ट ट्रैक कोर्ट: चढ़ावा चोरी से जुड़े इस संवेदनशील मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में डे-टू-डे बेसिस पर चलाई जाए।
कठोरतम सजा: करोड़ों सनातनियों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
इस पहली बड़ी कार्रवाई के बाद अब देश भर के रामभक्तों और राजनीतिक गलियारों की नजरें पुलिस की अगली जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।





