नई दिल्ली/अहमदाबाद | विधिक डेस्क सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद स्थित आसाराम आश्रम की जमीन और संपत्तियों के खिलाफ राज्य सरकार की दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने नगर निगम द्वारा जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' में खामियां पाते हुए मामले में यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट के फैसले पर प्रभावी रोक
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने गुजरात हाई कोर्ट के 17 अप्रैल के उस फैसले पर असरदार तरीके से रोक लगा दी है, जिसने मोटेरा स्थित लगभग 45,000 वर्ग मीटर जमीन पर सरकार के कब्जे का रास्ता साफ कर दिया था। यह जमीन विश्व प्रसिद्ध नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित है और प्रस्तावित 'सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स' का हिस्सा मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: "नोटिस में विवरणों का अभाव"
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार के नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानूनी कार्रवाई का आधार उसका नोटिस होता है, लेकिन इस मामले में:
प्रथम दृष्टया नोटिस में पर्याप्त और जरूरी विवरणों की कमी पाई गई।
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा, "आखिरकार, आपके केस को आपके द्वारा दिए गए नोटिस पर ही टिकना होगा।"
पक्ष-विपक्ष की दलीलें
आश्रम का पक्ष: आश्रम की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि ट्रस्ट को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि जमीन स्पोर्ट्स डेवलपमेंट जोन में आती है। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को 'गैर-कानूनी और दुर्भावनापूर्ण' बताया।
राज्य सरकार का पक्ष: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि आश्रम ने 1980 में आवंटित मूल 6,261 वर्ग मीटर जमीन से कहीं ज्यादा हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है और लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है।
मामले के मुख्य बिंदु:
जमीन का क्षेत्रफल: 45,000 वर्ग मीटर से अधिक।
विवाद का कारण: प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए जमीन की आवश्यकता और अतिक्रमण के आरोप।
अगली सुनवाई: 5 मई, 2026।
अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को अपना जवाबी हलफनामा और जमीन से संबंधित सभी जरूरी रिकॉर्ड पेश करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को भी अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई है। अब इस हाई-प्रोफाइल जमीन विवाद का भविष्य 5 मई को होने वाली सुनवाई पर टिका है।
संपादकीय सारांश: कानूनी प्रक्रियाओं में नोटिस की स्पष्टता कितनी अनिवार्य है, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उसी की पुष्टि करता है। फिलहाल आश्रम को एक बड़ी राहत मिली है, लेकिन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के भविष्य और जमीन के मालिकाना हक पर कानूनी जंग जारी है।





