कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कानून-व्यवस्था और न्याय की दिशा में अपना अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। बहुचर्चित और संवेदनशील 'आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड' में कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को राज्य के तीन वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
राज्य सचिवालय 'नवान्न' में आयोजित एक उच्च-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित अधिकारियों के निलंबन का आदेश दिया:
विनीत गोयल: कोलकाता पुलिस के तत्कालीन पुलिस आयुक्त (CP)।
इंदिरा मुखर्जी: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी।
अभिषेक गुप्ता: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों के विरुद्ध न केवल निलंबन की कार्रवाई की गई है, बल्कि इनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
न्याय की लड़ाई: 'बेटी' की मां अब सदन में
गौरतलब है कि आरजी कर मामले ने बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले लिया था। हालिया विधानसभा चुनावों में पीड़िता की मां ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की है। अब वह विधानसभा सदस्य के रूप में अपनी बेटी और बंगाल की महिलाओं के लिए न्याय की आवाज बुलंद कर रही हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस दौरान कहा:
"हमारी सरकार महिला सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलेगी। आरजी कर मामले में जो भी लापरवाही हुई है, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। दोषियों और कर्तव्य में कोताही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।"
जांच आयोग का गठन जल्द
सुवेंदु अधिकारी पहले ही इस पूरे कांड की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच आयोग बनाने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि इस आयोग की आधिकारिक घोषणा भी जल्द ही की जा सकती है।
इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि नई सरकार आरजी कर मामले को तार्किक परिणति तक पहुँचाने और पुलिस प्रशासन में शुचिता लाने के लिए कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।





