नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण (Special Intensive Revision) को लेकर कानूनी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी सख्त निगरानी रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी।

कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे तीन पूर्व न्यायाधीशों की एक समिति गठित करें, ताकि अपीलीय न्यायाधिकरणों के कामकाज में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

60 लाख दावों पर फैसला: 'अंतिम समय' की दौड़

चुनाव आयोग (ECI) ने शीर्ष अदालत को सूचित किया है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में आए 59.15 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निपटारा न्यायिक अधिकारियों द्वारा दोपहर तक कर लिया गया है।

अपडेट: शेष दावों पर आज रात तक फैसला ले लिया जाएगा।

पूरक सूची: चुनाव आयोग आज रात ही मतदाताओं की पूरक सूची (Supplementary List) प्रकाशित करने की तैयारी में है।

मालदा का जिक्र: सीजेआई ने मालदा जिले की घटना का हवाला दिया, जहां न्यायाधीशों का घेराव किया गया था। कोर्ट ने बताया कि वहां लगभग 8 लाख दावों पर निर्णय लिया जा चुका है।

"नहीं हटाए जाएंगे केंद्रीय बल" – सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

राज्य में सुरक्षा और न्यायिक अधिकारियों को मिल रही धमकियों पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

"अतीत की घटनाओं और वर्तमान में आ रहे खतरनाक सार्वजनिक बयानों को देखते हुए, पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। यदि राज्य मशीनरी विफल होती है, तो हम हस्तक्षेप करेंगे।"

कोर्ट का उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है जहां न्यायाधिकरण बिना किसी दबाव के अपनी अपीलों का निपटारा कर सकें।

बहिष्करण बनाम सत्यापन: राजनीतिक घमासान

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वकील कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे “भारत का बहिष्करण आयोग” करार दिया। उन्होंने मांग की कि जिन व्यक्तियों को 21 अप्रैल तक न्यायाधिकरण से मंजूरी मिल जाती है, उन्हें मतदान की अनुमति दी जाए।

विवाद की जड़: नवंबर 2025 से अब तक मतदाता सूची से 63,66,952 नाम हटाए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग की "लॉजिकल डिसकम्पेसी" (Logical Discrepancy) श्रेणी के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाने के खिलाफ याचिका दायर की है।

प्रमुख बिंदु और भविष्य की रूपरेखा

विवरणमहत्वपूर्ण जानकारी
अगली सुनवाई13 अप्रैल, दोपहर 3:00 बजे
समिति का गठनकलकत्ता HC के 3 पूर्व जजों का पैनल बनेगा
मतदान की तारीखें23 अप्रैल और 29 अप्रैल, 2026
अपील प्रक्रियाDM कार्यालय ऑफलाइन अपील की रसीद अनिवार्य रूप से देंगे

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचा तैयार है और 19 अपीलीय न्यायाधिकरण जल्द ही अपना काम सुचारू रूप से शुरू करेंगे। न्यायाधीशों के पारिश्रमिक का भुगतान भी जल्द सुनिश्चित किया जाएगा। बंगाल चुनाव से पहले मतदाता सूची का यह विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर है।