कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन को उखाड़ फेंकते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न केवल राज्य हार गई हैं, बल्कि अपने गढ़ भवानीपुर में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।
इन सबके बावजूद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद से इस्तीफा देने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह हार जनमत नहीं, बल्कि एक साजिश है। हम नैतिक रूप से जीते हैं, इसलिए मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी। संवैधानिक संस्थाएं जो चाहें कार्रवाई करें।"
इस्तीफा न देने पर क्या कहता है संविधान?
अगर कोई मुख्यमंत्री बहुमत खोने के बाद भी इस्तीफा देने से मना करता है, तो भारतीय संविधान में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान हैं:
अनुच्छेद 164 और राज्यपाल की शक्ति: संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। यदि यह स्पष्ट हो जाए कि मुख्यमंत्री ने सदन का विश्वास खो दिया है, तो राज्यपाल उन्हें पद से बर्खास्त करने का अधिकार रखते हैं।
फ्लोर टेस्ट (Floor Test): राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ममता बनर्जी को बहुमत साबित करने का आदेश दे सकते हैं। चूंकि भाजपा के पास 207 सीटें हैं और टीएमसी के पास केवल 80, ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पारित होते ही सरकार गिर जाएगी।
अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन): यदि मुख्यमंत्री संवैधानिक परंपराओं का उल्लंघन करती हैं और बहुमत न होने पर भी पद नहीं छोड़तीं, तो राज्यपाल इसे 'संवैधानिक मशीनरी की विफलता' मानकर केंद्र को राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेज सकते हैं।
ममता बनर्जी के तीखे आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा:
वोटों की लूट: उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 100 सीटों पर जनादेश की 'लूट' हुई है और काउंटिंग को जानबूझकर धीमा किया गया।
SIR विवाद: ममता ने दावा किया कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के जरिए 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो उनकी हार का बड़ा कारण बना।
अत्याचार का दावा: उन्होंने भाजपा पर चुनाव के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले और तांडव मचाने का आरोप भी लगाया।
आगे क्या होगा?
वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। नियमों के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होते ही ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी। यदि वे उससे पहले इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल सीवी आनंद बोस संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार को भंग कर सकते हैं और भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह रुख एक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत है, जिससे आने वाले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद तनावपूर्ण हो सकते हैं।





