चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में एक नया इतिहास रचा जा चुका है। सिनेमाई पर्दे से राजनीति के अखाड़े में उतरे थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने दशकों से चले आ रहे DMK और AIADMK के द्विध्रुवीय वर्चस्व को ध्वस्त कर दिया है। हालांकि, सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद विजय के लिए सत्ता का सिंहासन 'जादुई आंकड़े' की वजह से फिलहाल दूर नजर आ रहा है।
बहुमत की दहलीज पर अटकी TVK
234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। हालिया चुनावी नतीजों में विजय की TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीती हैं।
गठबंधन का गणित: कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ विजय का आंकड़ा 113 तक पहुँचता है।
पेच: विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता था, जिनमें से एक सीट छोड़ने के बाद यह प्रभावी आंकड़ा 112 रह जाएगा, जो बहुमत से अभी भी 6 सीट कम है।
राजभवन में 'वेटिंग गेम'
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय को लोक भवन आमंत्रित तो किया, लेकिन सरकार बनाने का न्योता देने के बजाय समर्थन की पुख्ता सूची मांग ली है। राजभवन ने स्पष्ट किया है कि जब तक आवश्यक विधायकों का लिखित विवरण पेश नहीं किया जाता, तब तक सरकार गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
'दुश्मन का दुश्मन दोस्त': DMK और AIADMK में खिचड़ी
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला मोड़ वह चर्चा है, जिसमें कट्टर प्रतिद्वंद्वी DMK और AIADMK के एक साथ आने की सुगबुगाहट है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यवाहक मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के बीच संपर्क हुआ है। विजय को सत्ता से दूर रखने के लिए EPS ने स्टालिन को समर्थन की पेशकश की है, जो तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में एक अविश्वसनीय घटनाक्रम है।
छोटे दलों की बढ़ी अहमियत
सत्ता की चाबी अब VCK और वामपंथी दलों जैसी छोटी पार्टियों के हाथ में है, जिनके पास कुल 6 विधायक हैं।
थोल थिरुमावलवन (VCK) ने पुष्टि की है कि विजय ने उनसे संपर्क किया है।
सहयोगी दलों ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को पहले मौका मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के दबाव में विजय के संवैधानिक अधिकार को बाधित किया जा रहा है।
विजय का 'मास्टरस्ट्रोक' या 'त्याग'?
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि यदि पारंपरिक पार्टियां (DMK-AIADMK) अनैतिक तरीके से सत्ता हथियाने की कोशिश करती हैं, तो विजय अपने सभी 108 विधायकों का सामूहिक इस्तीफा दिलवा सकते हैं। यह कदम राज्य को फिर से चुनाव की ओर ले जाएगा, जो विजय की लोकप्रियता को और बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष: तमिलनाडु अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ एक तरफ 'सुपरस्टार' की नई राजनीति है और दूसरी तरफ पुराने दिग्गजों के अस्तित्व की लड़ाई। शुक्रवार को EPS की राज्यपाल से मुलाकात के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।





