नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई भारतीय लोकतंत्र के महापर्व में आज पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदाताओं ने इतिहास रचने वाला उत्साह दिखाया। भारी सुरक्षा और कड़े पहरे के बीच दोनों राज्यों में मतदान संपन्न हुआ, जहाँ जनता ने लंबी कतारों में लगकर लोकतंत्र की नींव को और मजबूत किया।
मतदान के आँकड़े: रिकॉर्ड तोड़ उत्साह
शाम 6 बजे आधिकारिक रूप से मतदान की प्रक्रिया समाप्त हुई, हालांकि कई केंद्रों पर कतारों में लगे मतदाता देर शाम तक अपना वोट डालते रहे। शाम 5:30 बजे तक के प्राप्त आंकड़ों ने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है:
| राज्य | कुल सीटें | मतदान प्रतिशत (शाम 5:30 तक) | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|
| पश्चिम बंगाल | 152 (प्रथम चरण) | 89.93% | भारी उत्साह और कड़ा मुकाबला |
| तमिलनाडु | 234 (सभी सीटें) | 82.24% | एक ही चरण में चुनावी प्रक्रिया पूर्ण |
दोपहर से ही मतदान की गति तेज बनी रही। दोपहर 3 बजे जहाँ बंगाल में 78.77% वोटिंग हो चुकी थी, वहीं तमिलनाडु भी 70% के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा था। निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम और आधिकारिक मतदान प्रतिशत जल्द ही जारी किए जाएंगे।

सियासी रणभेरी: बयानों के तीखे बाण
मतदान समाप्त होते ही दोनों राज्यों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। नेताओं के दावों ने राजनीतिक पारे को और गर्मा दिया है।
अमित शाह का प्रहार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल के मतदान पर विश्वास जताते हुए कहा कि जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया है। उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के भ्रष्टाचार का सूरज अब डूब चुका है।"
ममता बनर्जी का पलटवार: वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारी मतदान को सरकार के समर्थन और बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ जनता का गुस्सा करार दिया। उन्होंने कहा, "बंपर मतदान का असली कारण मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के प्रति जनता का तीव्र प्रतिरोध है।"
निष्कर्ष: अब नतीजों का इंतज़ार
तमिलनाडु की सभी 234 सीटों का भाग्य अब ईवीएम (EVM) में बंद हो चुका है, जबकि बंगाल में यह पहले चरण की गूँज है जो अगले चरणों की दिशा तय करेगी। चुनावी पंडितों की मानें तो यह 'बंपर' वोटिंग सत्ता विरोधी लहर है या सत्ता समर्थक लहर, इसका फैसला तो आने वाले परिणाम ही करेंगे। फिलहाल, सुरक्षा बलों की निगरानी में ईवीएम को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रख दिया गया है।





