कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के तहत आज लोकतंत्र का महाकुंभ अपने चरम पर है। राज्य की 142 विधानसभा सीटों पर सुबह से ही मतदाताओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। यह चरण न केवल सत्ता के समीकरण तय करेगा, बल्कि बंगाल की भविष्य की दिशा भी निर्धारित करेगा। चुनावी मैदान में उतरे 1,448 प्रत्याशियों की किस्मत आज ईवीएम (EVM) में कैद हो रही है।

बंगाल चुनाव: शाम पांच बजे तक कुल 89.99% मतदान:

बंगाल चुनाव में शाम पांच बजे तक कुल 89.99% मतदान हुआ है। दूसरे चरण में मतदान के सारे रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है।

मतदाताओं में भारी उत्साह: दोपहर तक रिकॉर्ड वोटिंग

कड़ी सुरक्षा और चिलचिलाती धूप के बावजूद बंगाल की जनता में मतदान को लेकर जबरदस्त जुनून देखा जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

दोपहर 3 बजे तक का आंकड़ा: राज्य में अब तक 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया जा चुका है।

ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी इलाकों की तुलना में अधिक मतदान की खबरें आ रही हैं, जो इस चुनाव की व्यापकता को दर्शाता है।

सत्ता की जंग: 'चौथी पारी' बनाम 'परिवर्तन'

इस निर्णायक मोड़ पर राज्य की सियासत दो ध्रुवों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपनी सत्ता को बचाने और चौथी बार ऐतिहासिक वापसी के लिए संघर्ष कर रही है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बंगाल की धरती पर पहली बार 'कमल' खिलाने के लिए अपना पूरा दमखम लगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों के बाद भाजपा इस बार एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है।

निष्पक्षता पर सख्त रुख: 'ईवीएम से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं'

मतदान के बीच हिंसा और धांधली की छिटपुट खबरों के बीच विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने एक कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदान की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सुब्रत गुप्ता का बड़ा बयान: "हम मतदान प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से ले रहे हैं। जिन बूथों पर धांधली या धांधली की पुष्टि होगी, वहां चुनाव आयोग नियमानुसार दोबारा मतदान (Re-polling) कराएगा। उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।"

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अंतिम चरण को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ चुनाव संपन्न कराना है।

निष्कर्ष: 142 सीटों का यह जनादेश बंगाल की नई सरकार की रूपरेखा तय करेगा। जहाँ टीएमसी अपनी 'मां, माटी, मानुष' की नीति पर भरोसा जता रही है, वहीं भाजपा 'विकास और सुशासन' के वादे के साथ मतदाताओं को रिझा रही है। अब सबकी निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।