नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके मालवीय नगर से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। बुधवार की सुबह यहाँ के हौजरानी स्थित एक रेस्तरां में अचानक भीषण आग लग गई। इस खौफनाक मंजर में अब तक 20 से 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। फिलहाल मौके पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी है।

बेसमेंट से शुरू हुआ मौत का तांडव

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रेस्तरां इमारत के बेसमेंट में संचालित हो रहा था। सुबह अचानक बेसमेंट में आग भड़की और देखते ही देखते उसने विकराल रूप धारण कर लिया। धुएं और लपटों ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग का रूप इतना भयानक था कि इमारत में मौजूद कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपर से नीचे छलांग लगा दी।

अधिकारियों का बयान:

"इस बेहद दुखद हादसे में अब तक 12 से 14 लोगों की जान जा चुकी है। कुछ और लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।"

— अनंत मित्तल, डीसीपी

दमकल विभाग की तत्परता और रेस्क्यू

दिल्ली अग्निशमन सेवा को सुबह 8:50 बजे आग लगने की सूचना मिली। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत दमकल विभाग की 10 गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया।

त्वरित कार्रवाई: फायर ब्रिगेड की टीम ने सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए बेसमेंट में फंसे 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

अस्पताल में भर्ती: बचाए गए और घायल लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है।

निगरानी: नेहरू प्लेस फायर स्टेशन के डिविजनल ऑफिसर (DO) रविंदर खुद मौके पर मुस्तैद रहकर पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाले हुए हैं।

आग पर काबू, जांच जारी

ताजा अपडेट के अनुसार, दिल्ली अग्निशमन सेवा ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया है। हालांकि, आग लगने के असली कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। अधिकारियों का कहना है कि कूलिंग ऑपरेशन के बाद मामले की गहन जांच की जाएगी कि क्या रेस्तरां में सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) का पालन किया जा रहा था या नहीं।

चश्मदीदों की जुबानी: दहशत और जांबाजी की खौफनाक दास्तान

इस खौफनाक मंजर को अपनी आंखों से देखने वाले और लोगों की जान बचाने वाले स्थानीय युवाओं ने घटना का विवरण कुछ इस तरह साझा किया:

बच्चे को छाती से चिपकाए कूद गई मां

"सुबह करीब 9 बजे मैं अपनी दुकान की तरफ जा रहा था. आग पहले लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में लगी और देखते ही देखते पूरी 5 मंजिला बिल्डिंग में फैल गई. अंदर फंसे लोगों के लिए भागने की जगह नहीं थी, तो लोग ऊपर से कूदने लगे. एक महिला अपने छोटे से बच्चे को छाती से चिपकाए ऊपर से कूद गई, जिससे उसका पैर फ्रैक्चर हो गया. यह देखकर हमने तुरंत मोर्चा संभाला."

— शेरखान, चश्मदीद

गद्दे बिछाकर बचाई जान: चश्मदीद आसिफ ने बताया कि पूरी बिल्डिंग में बीचों-बीच सिर्फ एक संकरी सीढ़ी थी, जहां आग लगी थी. लोग खिड़कियों से लटक रहे थे. स्थिति को भांपते हुए गली के एक गद्दे वाले भाई ने समझदारी दिखाई और नीचे गद्दे बिछा दिए, ताकि ऊपर से कूदने वालों को गंभीर चोट न आए.

मुंह से सांस (CPR) देकर बचाई जिंदगी: एक अन्य जांबाज स्थानीय निवासी ने बताया, "आग इतनी भीषण थी कि कोई अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था, लेकिन हम सब गांव वाले अपनी जान की परवाह किए बिना अंदर घुसे. हमने नीचे का हिस्सा तोड़कर 7 से 8 लोगों को जिंदा बाहर निकाला. धुएं से कई लोगों का दम घुट चुका था, मैंने खुद 8 लोगों को अपने मुंह से सांस (CPR) देकर उनकी जान बचाई."

बाथरूम बने 'गैस चैंबर', विदेशी नागरिक भी थे मौजूद

स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे के वक्त इमारत में करीब 50 लोग मौजूद थे. पास में ही मैक्स अस्पताल होने के कारण इस होटल में ज्यादातर केन्या और अन्य देशों व राज्यों से आए मरीजों के तीमारदार ठहरे हुए थे. संकरी सीढ़ी पर आग होने के कारण जो लोग खिड़की से नहीं कूद पाए, वे खुद को बचाने के लिए बाथरूम की तरफ भागे. रेस्क्यू टीम को कई लोगों के शव बाथरूम के अंदर झुलसी और दम घुटी हालत में मिले, जो इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू था.

नियमों की धज्जियां: 6 कमरों की आड़ में 25 कमरों का खेल

इस हादसे ने दिल्ली में चल रहे अवैध निर्माणों और नियमों के उल्लंघन की पोल खोलकर रख दी है, जिससे स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश है:

अवैध संचालन: इस पांच मंजिला अवैध बिल्डिंग को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत दिल्ली सरकार से सिर्फ 6 कमरे चलाने का लाइसेंस मिला था.

बनाया 'डेथ ट्रैप': लालच के कारण नियमों को ताक पर रखकर यहाँ बेसमेंट समेत 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे, जिसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे.

मेक-4 (गंभीर श्रेणी) घोषित, जांच जारी

दमकल विभाग को सुबह सूचना मिलने के बाद घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे 'मेक-4' (गंभीर श्रेणी) घोषित किया गया और दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं. फिलहाल सभी घायलों का इलाज AIIMS ट्रॉमा सेंटर, मैक्स साकेत और पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल में चल रहा है.

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि अगर नगर निगम और संबंधित विभागों ने समय रहते इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई की होती, तो आज 21 मासूम जिंदगियां यूं खत्म न होतीं. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है।