कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा बंगाल के अधिकारियों को दी गई चेतावनी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है। एस्प्लेनेड के मेट्रो चैनल पर शुक्रवार से धरने पर बैठीं मुख्यमंत्री ने सीईसी को 'सुपर-गॉड' (Super-god) और 'विनाश' (Vanish) कुमार कहकर संबोधित किया और उन्हें अपनी मर्यादा में रहने की नसीहत दी।

"मई के बाद आपकी कुर्सी बचेगी या नहीं?"

ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार द्वारा अधिकारियों को "मई के बाद भी कार्रवाई" करने की कथित धमकी पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने मंच से गरजते हुए कहा:

"साहस होना अच्छी बात है, लेकिन 'दुस्साहस' (Temerity) के परिणाम सुखद नहीं होते। ज्ञानेश कुमार खुद को मार्वल का सुपरहीरो 'स्पाइडर-मैन' समझ रहे हैं। वह अधिकारियों को डरा रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले अपनी कुर्सी बचाने की चिंता करनी चाहिए। मई के बाद क्या उनकी कुर्सी रहेगी?"

मतदाता सूची और AI पर निशाना

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और जानबूझकर बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।

एआई (AI) का दुरुपयोग: ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल कर उपनामों में गलतियां की हैं। उन्होंने तंज कसा, "आपका दिमाग एआई खा जाएगा।"

लक्षित हटाना: उन्होंने दावा किया कि हिंदू और मुस्लिम दोनों के नाम निर्दयता से हटाए गए हैं, लेकिन विशेष रूप से 'M' अक्षर (मुस्लिम) को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, "शायद उन्हें मुझसे भी जलन है क्योंकि मेरा नाम भी 'M' से शुरू होता है।"

'लोकतंत्र की हत्या' का आरोप

ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के गठजोड़ पर हमला करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया:

तीन गोलियां: उन्होंने कहा कि जैसे महात्मा गांधी को तीन गोलियों से मारा गया था, वैसे ही भाजपा NRC, SIR (विशेष गहन संशोधन) और CAA की तिकड़ी से लोकतंत्र की हत्या कर रही है।

EVM और काउंटिंग: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की योजना पहले वोट काटने की है, फिर ईवीएम से छेड़छाड़ की और अंत में मतगणना के दिन केवल भाजपा की बढ़त वाली सीटें दिखाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की है।

सेना का राजनीतिकरण: मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाया कि भाजपा शासन में सेना भी अछूती नहीं रही है और कुछ जगहों पर सैन्य मुख्यालयों को पार्टी कार्यालयों में बदल दिया गया है।

कालीघाट मंदिर की घटना पर तंज

सीईसी के कालीघाट मंदिर दौरे के दौरान उनके कथित तौर पर फिसलने की घटना पर चुटकी लेते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "यह इस बात का संकेत है कि मां देवी भी उनसे खुश नहीं हैं क्योंकि उन्होंने वैध मतदाताओं के नाम हटाए हैं।"

अभिषेक बनर्जी का संकल्प: "60 लाख लोगों के हक की लड़ाई"

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि जब तक 60 लाख लोगों (जिनके नाम अधर में हैं) के मताधिकार बहाल नहीं होते, यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सीईसी कोलकाता के उसी होटल में क्यों ठहरे जहाँ अमित शाह और भाजपा के बड़े नेता रुकते हैं?

निष्कर्ष: बंगाल की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ संवैधानिक संस्थाएं और राज्य सरकार सीधे टकराव की स्थिति में हैं। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि 2026 की लड़ाई केवल 'बूथ' पर नहीं, बल्कि 'अधिकारों' के लिए सड़कों पर भी लड़ी जाएगी।