नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के डेबिट-फ्रीज किए गए बैंक खातों को ऑपरेट करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने ममता बनर्जी नीत TMC गुट को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि वह इस चरण में कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम इंतजाम में हस्तक्षेप नहीं करेगी और हाईकोर्ट से इस मामले पर शीघ्र सुनवाई कर फैसला सुनाने का अनुरोध किया है।

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अदालत में तीखी बहस और पक्ष-विपक्ष के तर्क:

  • TMC की दलील: वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि खातों को पूरी तरह सीज करने से पार्टी का दैनिक कामकाज और सांगठनिक गतिविधियां ठप्प हो गई हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को नियमित संचालन के लिए न्यूनतम 12.15 करोड़ रुपये प्रति माह की आवश्यकता है। साथ ही सिब्बल ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (ECI) की कार्यवाही केवल चुनाव चिह्न से संबंधित है, बैंक खातों से नहीं।
  • केन्द्र व जांच एजेंसी का पक्ष: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खातों में संदिग्ध व अवैध वित्तीय लेनदेन का हवाला देते हुए जांच जारी रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के आधार पर ही कानूनी कार्रवाई की गई है।

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क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस पूरे विवाद की जड़ें जून 2026 में दर्ज एक मामले से जुड़ी हैं:

  • बागी विधायक की शिकायत: पश्चिम बंगाल के बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 18 जून 2026 को बागी TMC विधायक विश्वनाथ दास ने एक शिकायत दर्ज कराई।
  • अवैध लेनदेन का आरोप: शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ गैरकानूनी गतिविधियों से जुटाया गया पैसा TMC से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने इंडियन बैंक के खातों पर रोक लगा दी।
  • हाईकोर्ट का स्पेशल ऑफिसर फॉर्मूला: इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने पार्टी के रोजमर्रा और प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए एक 'स्पेशल ऑफिसर' (प्रशासक) की नियुक्ति का अंतरिम फॉर्मूला तैयार किया था, जिसके तहत सीमित खर्च की अनुमति दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है और अब सभी पक्षों की नजरें कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली आगामी त्वरित सुनवाई पर टिकी हैं।

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