तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गहराए संगठनात्मक विवाद पर निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। आगामी विधानसभा उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले रिस्पॉन्डेंट गुट और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले पिटीशनर गुट में से कोई भी फिलहाल 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और पार्टी के आरक्षित चुनाव चिन्ह 'जोड़ा फूल' (Flowers & Grass) का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

यह व्यवस्था 6 अक्टूबर को रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि चुनाव चिन्ह (आरक्षण व आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत मूल विवाद पर अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाएगा।

आदेश की मुख्य बातें और शर्तें

  • नाम और सिंबल पर रोक: दोनों में से किसी भी गुट को 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के अकेले इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी।
  • विकल्प जमा करने की समय-सीमा: दोनों गुटों को 18 सितंबर 2026 की सुबह 11:00 बजे तक अपनी पसंद के तीन-तीन संभावित नाम और तीन मुक्त चुनाव चिन्ह (Free Symbols) प्राथमिकता क्रम में आयोग को सौंपने होंगे।
  • मूल पार्टी से जुड़ाव की छूट: नए नाम का चयन करते समय दोनों गुट चाहें तो अपने नाम के साथ मूल पार्टी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के संबंध का उल्लेख कर सकते हैं।
  • अंतरिम व्यवस्था: समय की कमी के कारण उपचुनावों में स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह फैसला लिया गया है, जो अंतिम निर्णय आने तक जारी रहेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों के अलग गुट बनाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी थी। इसके खिलाफ ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। आयोग के समक्ष दोनों पक्षों ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और राष्ट्रीय कार्यसमिति की वैधता को लेकर परस्पर विरोधी दावे प्रस्तुत किए हैं।