रायपुर:
उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ भी समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर दिया जाएगा।
UCC को लेकर राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की आज (शुक्रवार) पहली औपचारिक बैठक होने जा रही है, जिसमें कानून का खाका (Draft) तैयार करने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में 5-सदस्यीय समिति
छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC के अध्ययन, व्यापक सुझावों और अंतिम ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए 5 सदस्यों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जिसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किया गया था:
अध्यक्ष: पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सुप्रीम कोर्ट)
सदस्य: शत्रुघ्न सिंह, मोहन पवार, एम.के. राउत और ज्योति रानी सिंह
यह समिति उन राज्यों की व्यवस्थाओं का भी दौरा और अध्ययन करेगी जहाँ UCC पहले से लागू है या इसकी प्रक्रिया जारी है (जैसे उत्तराखंड)।
जनता और कानून विशेषज्ञों से लिए जाएंगे सुझाव
कमेटी का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और आम नागरिकों से संवाद स्थापित कर सुझाव एकत्र करना है।
“UCC कई राज्यों में लागू है और यह आज के समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार की बनाई कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का काम होगा। इसमें किसी का कोई नुकसान नहीं है।”
— अरुण साव, उपमुख्यमंत्री
क्या-क्या बदलेगा छत्तीसगढ़ में UCC लागू होने के बाद?
वर्तमान में राज्य में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने (Adoption) जैसे सिविल मामलों में अपने-अपने धार्मिक या पर्सनल लॉ का पालन करते हैं।
UCC लागू होने के बाद:
एक समान कानून: धर्म, जाति या समुदाय से परे जाकर प्रदेश के सभी नागरिकों पर एक समान सिविल कानून लागू होगा।
लैंगिक समानता (Gender Equality): पर्सनल लॉ के कारण होने वाले लैंगिक भेदभाव को समाप्त किया जाएगा और महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए जाएंगे।
पर्सनल लॉ की समीक्षा: विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।
विपक्ष के रुख पर सरकार का जवाब:
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस इस जनकल्याणकारी और प्रगतिशील सुधार का बेवजह विरोध कर राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार सभी पक्षों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही कानून को अंतिम रूप देगी।





