वेरावल/ऊना | भारतीय राजनीति और सामाजिक न्याय की दिशा बदलने वाले ऐतिहासिक 'ऊना कांड' में एक दशक लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अदालत का फैसला आ गया है। गुजरात की एक विशेष अदालत ने 2016 के इस चर्चित मामले में अपना निर्णय सुनाते हुए 42 आरोपियों में से 37 को बरी कर दिया है, जबकि 5 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें पाँच-पाँच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

फैसले के मुख्य बिंदु: सजा और राहत

अदालत ने सोमवार (16 मार्च) को अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसकी सजा का ऐलान आज (17 मार्च, 2026) किया गया।

दोषी: कोर्ट ने 5 व्यक्तियों को मारपीट और अन्य धाराओं में दोषी पाया।

बरी: साक्ष्यों के अभाव में 37 आरोपियों को बरी कर दिया गया।

पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट: मामले में आरोपी रहे तत्कालीन पुलिसकर्मियों—कंचनबेन, पीएसआई पांडे और ऊना पीएसओ करशनभाई—को भी अदालत ने निर्दोष पाया है। आरोपी निर्मल झाला की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।

क्या था 11 जुलाई 2016 का वह काला दिन?

यह घटना ऊना तालुका के मोटा समढियाला गाँव की है। कथित 'गौरक्षकों' के एक समूह ने एक दलित परिवार के चार युवकों को मरी हुई गाय की खाल उतारने के दौरान बेरहमी से पीटा था।

उन पर गोकशी का झूठा आरोप लगाया गया।

युवकों को अधनंगा कर सरेआम लाठियों और बेल्टों से पीटा गया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

इस घटना ने न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश में दलित उत्पीड़न के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन खड़ा कर दिया था।

अदालत की लंबी प्रक्रिया

बीते 10 वर्षों में इस मामले ने कई कानूनी उतार-चढ़ाव देखे:

गवाहियाँ: सुनवाई के दौरान 260 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

गंभीर धाराएँ: शुरुआत में आरोपियों पर हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएँ लगाई गई थीं, लेकिन कोर्ट ने इन धाराओं के तहत उन्हें दोषी नहीं माना।

आरोपियों की स्थिति: कुल 42 आरोपियों में से 2 की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी।

सामाजिक न्याय पर एक बड़ी बहस

ऊना कांड सिर्फ एक स्थानीय मारपीट की घटना नहीं थी; इसने देश में 'कानून के राज' और 'जातिगत भेदभाव' पर एक वैश्विक बहस छेड़ दी थी। आज आए इस फैसले पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहाँ कुछ इसे न्याय की जीत मान रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में आरोपियों के बरी होने पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।