रोहतक/भिवानी: "अंगदान महादान" की कहावत को चरितार्थ करते हुए भिवानी के एक परिवार ने अपने इकलौते सहारा को खोने के गम के बीच मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। भिवानी के जुई कलां निवासी विजेंद्र (ब्रेन डेड घोषित) के अंगों से चार गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला है।
250 जवान और 60 मिनट: जब सड़क पर थम गई रफ्तार
अंगों को समय पर दिल्ली और गुरुग्राम पहुंचाने के लिए रोहतक पुलिस ने जबरदस्त सक्रियता दिखाई।
ग्रीन कॉरिडोर: पीजीआईएमएस रोहतक से दिल्ली और गुरुग्राम के अस्पतालों के लिए विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया गया।
पुलिस की मुस्तैदी: एसपी गौरव राजपुरोहित की सीधी निगरानी में करीब 250 पुलिस जवानों ने ट्रैफिक को नियंत्रित किया।
समय की बचत: वीरवार दोपहर 2:50 से 3:50 बजे के बीच हर 15 मिनट पर एम्बुलेंस रवाना की गईं। इस तालमेल से सामान्य समय के मुकाबले 60 से 70 प्रतिशत समय की बचत हुई, जो अंगों की कार्यक्षमता के लिए बेहद अहम थी।
कहां-कहां भेजे गए अंग?
विजेंद्र के शरीर से निकाले गए अंगों को अलग-अलग विशेषज्ञ अस्पतालों में ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया:
हार्ट (दिल): फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला (दिल्ली)।
लंग्स (फेफड़े): आर्टेमिस अस्पताल, गुरुग्राम।
किडनी-पैंक्रियाज और लीवर: एम्स (AIIMS), नई दिल्ली।
13 दिनों का संघर्ष और पिता का साहसी फैसला
विजेंद्र के पिता राजबीर ने रुंधे गले से बताया कि 26 मार्च को विजेंद्र संदिग्ध हालत में बस स्टैंड पर मिला था। 13 दिनों तक पीजीआई के आईसीयू में जीवन और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद डॉक्टरों ने उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया। विजेंद्र एक मजदूर था और अपने पीछे 12 वर्षीय बेटे को छोड़ गया है। परिवार ने अपनी व्यक्तिगत क्षति से ऊपर उठकर दूसरों के जीवन को प्राथमिकता दी और अंगदान की सहमति दी।
क्या होता है ग्रीन कॉरिडोर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक अस्थाई मार्ग होता है जहाँ पुलिस सभी ट्रैफिक सिग्नल को मैन्युअली कंट्रोल करती है ताकि एम्बुलेंस बिना रुके अपने गंतव्य तक पहुँच सके। अंगों के ट्रांसप्लांटेशन में हर एक मिनट कीमती होता है, क्योंकि शरीर से बाहर निकालने के बाद अंगों की उम्र बहुत कम होती है।
संदेश: विजेंद्र अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी धड़कनें और उनकी आँखें किसी और के जरिए इस दुनिया को देखेंगी। समाज को इस साहसी परिवार और पुलिस के इस समन्वित प्रयास से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।





