नई दिल्ली | देश में मासूमों के बचपन को निगल रहे 'चाइल्ड ट्रैफिकिंग' (बाल तस्करी) के मकड़जाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। विभिन्न राज्यों के गृह सचिवों को सीधी चेतावनी देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि अब भी राज्य सरकारें नहीं जागीं, तो यह समस्या पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।

"अदालत केवल निगरानी कर सकती है, एक्शन सरकार को लेना होगा"

जस्टिस की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि बाल तस्करी को रोकना केवल कागजी कार्रवाई से संभव नहीं है। अदालत ने राज्य के गृह विभागों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा:

"एक कोर्ट के रूप में हम केवल निगरानी (Monitoring) कर सकते हैं और निर्देश दे सकते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई राज्य सरकार, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को ही करनी होगी। यह गृह विभाग प्रमुखों की सीधी जिम्मेदारी है।"

देशभर में सक्रिय हैं शातिर गिरोह

सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में देशभर में बाल तस्करी के गिरोह बेहद सक्रिय हैं। हर दिन बच्चों के गायब होने और तस्करी की रिपोर्टें सामने आ रही हैं। अदालत ने कहा कि यह एक 'बेकाबू' होती स्थिति है जिसे तत्काल रोकना अनिवार्य है।

इच्छाशक्ति की कमी पर उठाए सवाल

अदालत ने सकारात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि जब कभी पुलिस कार्रवाई करती है, तो बच्चों को छुड़ाने की खबरें भी आती हैं।

इच्छाशक्ति का अभाव: SC ने कहा कि बच्चों को छुड़ाया जाना इस बात का प्रमाण है कि समस्या का समाधान मुमकिन है, बशर्ते शासन में 'मजबूत इच्छाशक्ति' हो।

गंभीर परिणाम: अगर आज इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यह संकट और भी भयावह रूप ले लेगा।

गृह सचिवों को सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों के गृह सचिवों को आदेश दिया है कि:

बाल तस्करी रोकने के लिए तत्काल कार्ययोजना (Action Plan) तैयार करें।

गृह विभाग अपनी सतर्कता बढ़ाए और खुफिया तंत्र को मजबूत करे।

तस्करी की रिपोर्टों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख ने यह साफ कर दिया है कि अब चाइल्ड ट्रैफिकिंग के मुद्दे पर टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले की निरंतर निगरानी करती रहेगी और राज्यों की जवाबदेही तय की जाएगी।