शिवहर/पटना।

बिहार के विकास और जल प्रबंधन के इतिहास में रविवार का दिन एक स्वर्णिम मील का पत्थर साबित हुआ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिवहर जिले में राज्य की पहली और महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना—‘बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल’—का रिमोट का बटन दबाकर भव्य उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक पल के साथ ही बेलवा डैम से बागमती नदी की कल-कल बहती धाराएं लिंक चैनल के माध्यम से मुजफ्फरपुर के मीनापुर स्थित बूढ़ी गंडक नदी की ओर रवाना हो गईं।

इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए भारी संख्या में केंद्रीय व राजकीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय जनता मौजूद रही।

बाढ़ से मुक्ति और सिंचाई की नई सौगात

इस परियोजना के शुरू होने से शिवहर, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। यह कदम क्षेत्र को हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से मुक्ति दिलाएगा।

बाढ़ नियंत्रण का नया मैकेनिज्म: इस परियोजना के तहत बागमती नदी की मुख्य धारा का 40 फीसदी पानी (करीब 50 लाख क्यूसेक जल) लिंक चैनल के जरिए सीधे बूढ़ी गंडक नदी में डायवर्ट किया जा सकेगा।

लाखों किसानों को संजीवनी: परियोजना से तीन जिलों के लगभग 50 लाख किसानों की 1.39 लाख हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई का संकट हमेशा के लिए खत्म हो गया है।

"इस परियोजना के शुरू होने से इलाके के विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी। अब किसानों के सामने न तो सिंचाई की कोई बाधा होगी और न ही बाढ़ की चुनौती रहेगी।"

— सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री (बिहार)

करोड़ों की विकास योजनाओं की बरसात

मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल नदी जोड़ो परियोजना तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इलाके को कुल 184 करोड़ छह लाख 82 हजार रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं की सौगात दी:

योजना/परियोजनालागत (रुपये में)स्थिति
बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल130 करोड़ 88 लाख 57 हजारउद्घाटन (लोकार्पण)
22 अन्य सरकारी योजनाएं (स्वास्थ्य, शिक्षा आदि)149 करोड़ 13 लाख 37 हजारउद्घाटन (लोकार्पण)
18 नई विकास योजनाएं (पंचायती राज, भवन प्रमंडल)34 करोड़ 93 लाख 45 हजारशिलान्यास

प्रशासनिक अमला और गणमान्य लोग रहे मौजूद

वीआईपी कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस गरिमामयी समारोह में जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार और शिवहर की जिलाधिकारी प्रतिभा रानी सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

इस परियोजना के धरातल पर उतरने से स्थानीय जनता और किसानों में भारी उत्साह है, क्योंकि यह आधुनिक बिहार के जल प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।