कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की औपचारिक घोषणा से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की तैयारी शुरू हो गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदाताओं में विश्वास जगाने के लिए राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 480 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इनमें से पहली 240 कंपनियां 28 फरवरी 2026 तक पहुंच जाएंगी, जबकि शेष 240 कंपनियां 10 मार्च तक मोर्चा संभाल लेंगी।
उत्तर 24 परगना में सबसे भारी तैनाती
बांग्लादेश सीमा से सटे उत्तर 24 परगना जिले को सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना गया है, जहां सबसे ज्यादा 30 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। इनका वितरण इस प्रकार है:
बैरकपुर पुलिस जिला: 9 कंपनियां
बसीरहाट: 7 कंपनियां
बारासात: 6 कंपनियां
बनगांव और बिधाननगर: 4-4 कंपनियां
मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना दूसरे नंबर पर
मुर्शिदाबाद जिला, जहां अल्पसंख्यक आबादी का अनुपात राज्य में सबसे अधिक (66.27%, 2011 जनगणना) है, वहां 16 कंपनियां तैनात होंगी। इसके बाद दक्षिण 24 परगना और हावड़ा का नंबर आता है, जहां 15-15 कंपनियां तैनात की जाएंगी।
किन जिलों में कितनी कंपनियां? (प्रमुख आंकड़े)
| जिला | कंपनियों की संख्या | विशेष टिप्पणी |
|---|---|---|
| उत्तर 24 परगना | 30 | सबसे अधिक तैनाती, सीमावर्ती क्षेत्र |
| मुर्शिदाबाद | 16 | मुर्शिदाबाद और जंगीपुर में 8-8 कंपनियां |
| दक्षिण 24 परगना | 15 | डायमंड हार्बर, बारुईपुर और सुंदरबन |
| हावड़ा | 15 | ग्रामीण और कमिश्नरेट क्षेत्र |
| पूर्व मेदिनीपुर | 14 | विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का गृह जिला |
| हुगली | 14 | चंदननगर और हुगली ग्रामीण |
| कोलकाता / मालदा / नदिया | 12 प्रत्येक | संवेदनशील शहरी और ग्रामीण क्षेत्र |
सुरक्षा बलों का वर्गीकरण: कौन-सी फोर्स कितनी?
निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देशानुसार, तैनात होने वाली 480 कंपनियों में विभिन्न बलों का मिश्रण इस प्रकार है:
CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल): 230 कंपनियां
BSF (सीमा सुरक्षा बल): 120 कंपनियां
ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस): 47 कंपनियां
CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल): 37 कंपनियां
SSB (सशस्त्र सीमा बल): 46 कंपनियां
जल्द तैनाती का उद्देश्य: 'एरिया डोमिनेशन'
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की तारीखों से काफी पहले बलों को भेजने का मुख्य उद्देश्य एरिया डोमिनेशन, कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 28 फरवरी को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद संभावित तनाव को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया (विशेष गहन संशोधन - SIR) पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग का ध्यान निष्पक्ष और हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करने पर है।





