नई दिल्ली/मालदा | पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर उपजा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच गया है। यहाँ भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए रखा, जिसमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को 'न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला' करार देते हुए बंगाल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है।

"बिना भोजन-पानी और सुरक्षा के छोड़ा": सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस घटना पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बिना सुरक्षा, भोजन और पानी के भीड़ के रहमों-करम पर छोड़ दिया गया। कोर्ट ने इसे प्रशासन की बड़ी विफलता बताते हुए कहा कि सूचना होने के बावजूद राज्य सरकार सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही।

मुख्य सचिव और DGP को 'कारण बताओ' नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और राज्य के शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा कसा है:

नोटिस जारी: कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है।

जवाबदेही: प्रशासन से पूछा गया है कि समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए और अधिकारियों को भीड़ के बीच असुरक्षित क्यों छोड़ा गया?

वर्चुअल पेशी: संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअल रूप से पेश होने और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश

अदालत ने केवल फटकार ही नहीं लगाई, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए हैं:

केंद्रीय बल: चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए।

SIR प्रक्रिया: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट सुधार (SIR) प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और अधिकारियों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए।

सुरक्षा आकलन: अधिकारियों और उनके परिवारों को खतरे का तुरंत आकलन कर उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

"यह घटना कानून के शासन (Rule of Law) को चुनौती देने जैसी है। हम न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।" — सुप्रीम कोर्ट

क्या है पूरा मामला?

मालदा में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में स्थानीय लोग उग्र हो गए थे। गुस्से का शिकार उन न्यायिक अधिकारियों को होना पड़ा जो चुनावी ड्यूटी या संबंधित प्रक्रिया का हिस्सा थे। भीड़ ने उन्हें घेरकर बंधक बना लिया, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। प्रशासन की सुस्ती ने आग में घी का काम किया, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने 'संवैधानिक विफलता' की तरह देखा है।

फिलहाल, मालदा के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले की खुद निगरानी कर रहा है।