लखनऊ: "मेरे पिता मजदूरी करते हैं। मैं कक्षा एक से इसी स्कूल में पढ़ रही हूँ। जब अपनी क्लास की बेंच और कुर्सियों को मैदान में कबाड़ की तरह फेंका देखा, तो दिल टूट गया। योगी जी, प्लीज हमारा स्कूल बचा लीजिए!" आँखों में आंसू और हाथों में तख्तियां लिए यह गुहार कक्षा 8 की छात्रा श्रेया कश्यप की है।
यह दर्द सिर्फ श्रेया का नहीं है, बल्कि राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित 'विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल' की उन 250 छात्राओं का है, जिनका भविष्य इस समय अधर में लटका हुआ है। सरकार संचालित इस सहायता प्राप्त (Aided) विद्यालय को खाली कराए जाने के विरोध में शनिवार को कड़ाके की धूप के बीच छात्राएं, उनके गरीब मजदूर अभिभावक और शिक्षक संगठन सड़क पर उतर आए और धरने पर बैठ गए।
गर्मियों की छुट्टियों में 'एक्शन': अलमारियां, पंखे और सरकारी दस्तावेज बाहर फेंके
विद्यालय की प्रबंधक संतोष रस्तोगी और शिक्षकों का आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई को बेहद संदेहास्पद तरीके से अंजाम दिया गया। स्कूल में गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं, जिसका फायदा उठाकर बीते बृहस्पतिवार को हजरतगंज पुलिस की मौजूदगी में एडीएम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पूरे स्कूल को जबरन खाली करा दिया गया।
शिकायत के मुताबिक, चौकी प्रभारी और 15-20 अज्ञात लोग स्कूल परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने स्कूल का ताला तोड़ा और वहां रखा कीमती फर्नीचर, अलमारियां, सीलिंग फैन, कूलर और सबसे महत्वपूर्ण— विद्यालय के सरकारी अभिलेख (Records) उठाकर खुले मैदान में फेंक दिए।
"मामला कोर्ट में है, तो इतनी हड़बड़ी क्यों?" स्कूल प्रबंधन के अनुसार, इमारत से जुड़ा यह विवाद पिछले 4 साल से अदालत में लंबित है। 21 अप्रैल 2026 को एडीएम सिटी ईस्ट की ओर से स्कूल खाली करने का आदेश हुआ था, जिसके खिलाफ प्रबंधन ने जिला जज की अदालत में स्टे (Ste) की अपील दायर कर रखी है। इस मामले पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी तय है। इसके बावजूद कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना गुपचुप तरीके से यह कार्रवाई कर दी गई।
सिसक पड़ीं बेटियां: "प्राइवेट स्कूल की फीस कहां से लाएंगे पापा?"
धरनास्थल पर मौजूद छात्राओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है:
जूही (छात्रा): "मेरा सपना पढ़-लिखकर कुछ बनने का है। मेरे पापा मुझे किसी महंगे प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा सकते। अगर यह स्कूल बंद हुआ तो मेरी पढ़ाई छूट जाएगी।"
अलीशा सिद्दीकी (छात्रा): "मुख्यमंत्री जी से हाथ जोड़कर निवेदन है कि हमारा स्कूल बचाइए। छुट्टियां खत्म होने के बाद हम कहाँ पढ़ने जाएंगे?"
सिकंदर (अभिभावक व प्राइवेट ड्राइवर): "मैं एक मामूली ड्राइवर हूँ। इतनी महंगाई में घर चलाऊँ या प्राइवेट स्कूल की हजारों रुपये फीस भरूं? हमारे जैसे गरीबों के लिए यही सरकारी स्कूल एकमात्र सहारा था।"
"गेट पर ही चलाएंगे कक्षाएं, झुकेंगे नहीं"— शिक्षक संगठन और विपक्ष लामबंद
इस मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है। छात्राओं के समर्थन में माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट, पांडेय गुट और एकजुट संघ के पदाधिकारी भी धरनास्थल पर पहुंचे।
प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने साफ किया, "यह स्कूल 1936 से चल रहा है, जब देश गुलाम था। यहां के स्टाफ को सरकार वेतन देती है। हम बेटियों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे, जरूरत पड़ी तो स्कूल के गेट पर ही क्लास चलाएंगे।"
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है, दूसरी तरफ भू-माफियाओं के इशारे पर बेटियों का स्कूल बंद कराया जा रहा है। सरकार को इन गुंडों पर नियंत्रण करना चाहिए।"
शिक्षक नेताओं (आशीष कुमार सिंह व सोहन लाल वर्मा) ने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत जिला प्रशासन की मिलीभगत से करोड़ों की इस प्राइम लोकेशन की जमीन पर कब्जा कराया गया है।
प्रशासनिक दखल: मुख्यमंत्री से लेकर गृह सचिव तक गुहार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा), प्रमुख सचिव (गृह), पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को आपातकालीन शिकायती पत्र भेजकर तुरंत दखल देने की मांग की है।
दूसरी ओर, माध्यमिक लखनऊ मंडल के जेडी डॉ. प्रदीप कुमार ने नियमों का हवाला देते हुए कहा, "इंटरमीडिएट एक्ट के तहत जो भी कानूनी प्रावधान हैं, उनके तहत इस स्कूल को हर हाल में बचाया जाएगा। नियमतः किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय को न तो बेचा जा सकता है और न ही इस तरह बंद किया जा सकता है।"
अब देखना यह है कि 'मिशन शक्ति' और महिला शिक्षा को प्राथमिकता देने वाली योगी सरकार इन 250 मासूम बेटियों की सिसकियों पर क्या संज्ञान लेती है और रसूखदारों के आगे बेबस नजर आ रहे इस 90 साल पुराने शिक्षा के मंदिर को बचा पाती है या नहीं।





