वाशिंगटन / नई दिल्ली:

अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Commerce Department) के ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी (BIS) ने फेडरल रजिस्टर में एक अहम नोटिस जारी कर भारत सहित 20 देशों से आने वाली चुनिंदा दवाओं और उनके कच्चे माल (APIs/Key Ingredients) पर जीरो-टैरिफ (0% Import Duty) की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। यह कदम ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत कुछ पेटेंटेड दवाओं पर 100% एड वैलोरम टैरिफ (Ad Valorem Tariff) लगाने के बीच राहत के रूप में आया है।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि यह छूट भारत से निर्यात होने वाली हर दवा पर लागू नहीं होगी, बल्कि यह विशिष्ट और जीवनरक्षक दवाओं (Specialty Drugs) तक ही सीमित रहेगी।

किन दवाओं पर नहीं लगेगा कोई टैरिफ?

जीरो-टैरिफ व्यवस्था के दायरे में मुख्य रूप से निम्नलिखित फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और उनके आवश्यक घटक (Ingredients) शामिल किए गए हैं:

  • ऑर्फन ड्रग्स (Orphan Drugs): दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के इलाज में काम आने वाली विशेष दवाएं।
  • फर्टिलिटी ड्रग्स: बांझपन व प्रजनन संबंधी इलाज की दवाएं।
  • सेल और जीन थेरेपी: एडवांस बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स।
  • प्लाज्मा थेरेपी व न्यूक्लियर मेडिसिन: रक्त प्लाज्मा से तैयार दवाएं और रेडियोलॉजिकल उत्पाद।
  • एंटीबॉडी ड्रग कॉन्जुगेट्स (ADCs): कैंसर व अन्य जटिल बीमारियों के लिए टारगेटेड थेरेपी।
  • मेडिकल काउंटरमेजर्स: केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल व न्यूक्लियर खतरों से निपटने वाली दवाएं।
  • एनिमल हेल्थ प्रोडक्ट्स: कुछ विशिष्ट पशु स्वास्थ्य दवाएं।
  • क्लिनिकल ट्रायल सामग्री: शोध, अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों के लिए भेजी जाने वाली गैर-व्यावसायिक दवाएं।

इसे भी पढ़ेंः सीमा सुरक्षा में गेम चेंजर बना टेथर्ड ड्रोन: 'ऑपरेशन सिंदूर' में सफलता के बाद भारतीय सेना ने दोगुनी की ऑर्डर क्षमता

भारत के अलावा इन 19 देशों को भी छूट

अमेरिका द्वारा जारी इस लिस्ट में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ (EU), ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।

100% टैरिफ का क्या है मामला और जेनेरिक दवाओं पर असर?

अमेरिका ने अपने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धारा 232 के तहत विदेश से आने वाली पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने की प्रक्रिया शुरू की है।

भारत के लिए राहत की बात:

  1. जेनेरिक दवाओं पर असर नहीं: यह 100% शुल्क फिलहाल साधारण जेनेरिक दवाओं (Generic Drugs) पर लागू नहीं होता है। भारतीय फार्मा एक्सपोर्ट का बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का है, इसलिए आम दवाओं का निर्यात अप्रभावित रहेगा।
  2. विशेष दवाओं को सुरक्षा: जीवनरक्षक और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को जीरो-टैरिफ में रखकर अमेरिका ने यह सुनिश्चित किया है कि वहां स्वास्थ्य सेवाओं में आपूर्ति की कमी न हो।

इसे भी पढ़ेंः यूपी विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने घोषित किए अंतिम 6 प्रत्याशी, सभी 11 सीटों पर उम्मीदवार तय

कंपनियां कैसे ले सकती हैं छूट?

यदि किसी भारतीय फार्मा कंपनी को अमेरिका की तत्काल स्वास्थ्य आवश्यकताओं (Urgent Health Needs) को पूरा करने वाली श्रेणी में जीरो-टैरिफ का लाभ चाहिए, तो उसे आवेदन करना होगा। इसमें प्रोडक्ट क्लासिफिकेशन, एक्टिव इंग्रीडिएंट्स, मैन्युफैक्चरर और अमेरिका में उसकी मेडिकल जरूरत की विस्तृत जानकारी देनी होगी। अमेरिकी वाणिज्य विभाग 'यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव' और 'डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज' से सलाह के बाद केस-बाय-केस आधार पर छूट देने का फैसला करेगा।

#USPharmaTariff #PharmaNews #IndiaUS Trade #ZeroTariff #OrphanDrugs #IndianPharma #GenericDrugs #MedicineExport #TradeExpansionAct #BreakingNews

#फार्मासमाचार #भारतअमेरिकाव्यापार #सोनेकीदवाएं #जीरोटैरिफ #कृषिएवंऔषधि #स्वास्थ्यसमाचार #ताजाखबर